Friday, September 11, 2026 |
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कठिन क्षेत्रों में भरोसेमंद बिजली के लिए लघु जल विद्युत योजना को मिली प्राथमिकता

by Business Remedies
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View of a small hydroelectric project located in a hilly area

नई दिल्ली,

सरकार ने कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से लघु जल विद्युत विकास योजना (2026-31) को प्राथमिकता दी है। इस योजना के तहत 2,584.60 करोड़ रुपये के निवेश से 1,500 मेगावाट नई क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। आधिकारिक तथ्य पत्र के अनुसार, यह योजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित होगी जहां अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत सीमित प्रभावी होते हैं।

यह योजना देश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में लघु जल विद्युत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति कदम मानी जा रही है। भारत में लघु जल विद्युत की कुल संभावित क्षमता 21,133.61 मेगावाट आंकी गई है, जो 7,133 पहचाने गए स्थलों पर उपलब्ध है। साल 2026 की शुरुआत तक लगभग 5,171 मेगावाट क्षमता का उपयोग किया जा चुका है, जो कुल क्षमता का करीब 24.5 प्रतिशत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है। वहीं, शेष 15,960 मेगावाट से अधिक क्षमता भविष्य में तेजी से विकास के लिए बड़ा अवसर प्रदान करती है, जिसे नीतिगत सहयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस महत्व को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत 1 से 25 मेगावाट क्षमता वाले लघु जल विद्युत परियोजनाओं को विभिन्न राज्यों में विकसित किया जाएगा। यह योजना विशेष रूप से पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए लाभकारी होगी, जहां ऐसी परियोजनाओं की बड़ी संभावनाएं हैं। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से करीब 1,500 मेगावाट नई क्षमता विकसित करना है, जिसमें पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच की चुनौतियां अधिक हैं और वहां स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन से स्थायी समाधान मिल सकता है। सरकार के अनुसार, विकेन्द्रीकृत और स्थानीय स्तर पर उत्पादित बिजली को बढ़ावा देकर यह योजना दूरदराज और कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराएगी और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करेगी।

इस योजना से लघु जल विद्युत क्षेत्र में लगभग 15,000 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही, इसमें स्वदेशी संयंत्र और मशीनरी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी और स्थानीय विनिर्माण तथा आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिलेगा। दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत कम से कम 200 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने में सहायता दी जाएगी। इसके लिए 30 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है, जिससे केंद्र और राज्य एजेंसियों को भविष्य की परियोजनाओं की मजबूत श्रृंखला विकसित करने में मदद मिलेगी। सरकार ने कहा कि लघु जल विद्युत देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद स्रोत के रूप में उभर रहा है। यह विशेष रूप से पहाड़ी, दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जहां विकेन्द्रीकृत बिजली उत्पादन से ऊर्जा पहुंच बेहतर होगी और स्थानीय आजीविका को भी समर्थन मिलेगा।



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