नई दिल्ली,
निवेशकों को चांदी में मुनाफावसूली कर अपनी राशि को विविधीकृत भारतीय इक्विटी फंड या ब्लू-चिप शेयरों में स्थानांतरित करने पर विचार करना चाहिए। यह सलाह व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक ताजा रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमती धातुओं में निवेश का हिस्सा सुरक्षित स्तर तक सीमित रखना चाहिए और चांदी में जारी तेजी का पीछा नहीं करना चाहिए। फंड हाउस ने स्पष्ट कहा है कि वर्तमान मूल्यांकन के आधार पर चांदी ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में काफी अधिक बढ़ चुकी है, इसलिए इस स्तर पर मुनाफा निकालना समझदारी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, जब चांदी सोने की तुलना में बहुत तेज गति से बढ़ती है, तो यह अक्सर तेजी के अंतिम सट्टात्मक चरण का संकेत होता है। ऐसे चरण आमतौर पर निवेशकों के हित में समाप्त नहीं होते और बाद में कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिलती है। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड ने कहा कि वर्तमान गोल्ड-टू-सिल्वर अनुपात लगभग 46:1 पर आ गया है, जबकि पिछले 10 वर्षों का औसत लगभग 80:1 रहा है। यह अनुपात दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्य को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब यह अनुपात 50:1 से नीचे चला जाता है, तो चांदी सस्ती नहीं मानी जाती। पिछले चक्रों में ऐसा स्तर आने के बाद औसत की ओर वापसी हुई है, जिसमें चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक तेज गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमजोर होता रुपया अक्सर धातुओं में निवेश को उचित ठहराने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन इतिहास बताता है कि सट्टात्मक उछाल के फूटने पर यह निवेशकों को नुकसान से नहीं बचा सकता। फंड हाउस ने अपने दृष्टिकोण में कहा कि सोना या चांदी का एक औंस किसी प्रकार का नकद प्रवाह उत्पन्न नहीं करता। इसके विपरीत Nifty 50 की कंपनियां अपने मुनाफे का पुनर्निवेश कर कारोबार बढ़ाती हैं और निवेशकों को लाभांश के रूप में नकद वापसी तथा पूंजी वृद्धि का अवसर देती हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि स्थापना से अब तक Nifty 50 (TRI) ने लगभग 13.2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ सोने के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है। साथ ही, भौतिक धातु रखने की तुलना में इसमें अधिक तरलता भी उपलब्ध होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का पुनर्संतुलन करना चाहिए और अत्यधिक बढ़ चुकी चांदी में जोखिम घटाकर मजबूत भारतीय शेयरों में दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान देना चाहिए।

