New Delhi,
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में Economic Survey 2026 पेश किया। यह दस्तावेज वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर आधिकारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। सरकार के अनुसार, चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है।
Economic Survey 2026 में चालू वित्त वर्ष FY26 और आगामी वित्त वर्ष FY27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की अनुमानित वृद्धि दर का उल्लेख किया जाएगा। यह प्रमुख पूर्व बजट दस्तावेज देश के वार्षिक आर्थिक विकास का सार प्रस्तुत करता है और अल्पकालिक तथा मध्यम अवधि की संभावनाओं का खाका तैयार करता है। इसमें निवेश, बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और ग्रामीण मांग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की स्थिति का आकलन शामिल है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंता नागेश्वरन बाद में Economic Survey 2026 के प्रमुख निष्कर्षों और नीतिगत सुधारों की जानकारी देंगे। इसमें रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच भारत ने किस प्रकार स्थिरता बनाए रखी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार Union Budget प्रस्तुत करने वाली पहली महिला बनकर संसदीय इतिहास में नया अध्याय जोड़ रही हैं। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। वित्त मंत्री 1 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करेंगी। वर्ष 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का यह दूसरा पूर्ण बजट होगा। सरकार का दावा है कि पिछले एक दशक में भारत ने प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत आधार तैयार किया है, जिससे भविष्य की विकास दर को गति मिलेगी।
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ है और यह दो चरणों में आयोजित होगा। पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद 9 मार्च से 2 अप्रैल तक दूसरा चरण होगा। कुल 65 दिनों की अवधि में 30 बैठकें निर्धारित की गई हैं। 13 फरवरी को सदन स्थगित होगा ताकि संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की समीक्षा कर सकें। Economic Survey 2026 को आगामी Union Budget की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है, जिसमें आर्थिक सुधारों, राजकोषीय संतुलन और विकास रणनीति पर स्पष्ट संकेत मिलने की संभावना है।

