नई दिल्ली,
Economic Survey 2025-26 में बताया गया है कि भारत FY25 में 135.4 अरब डॉलर के साथ दुनिया का सबसे बड़ा Remittances प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है। यह प्रवाह देश के External Account को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश सर्वेक्षण में कहा गया कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले Remittances का हिस्सा बढ़ा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कुशल और पेशेवर भारतीय कामगारों का योगदान लगातार मजबूत हो रहा है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की Export Competitiveness बढ़ाने के लिए Manufacturing लागत को कम करने की दिशा में एकीकृत प्रयास आवश्यक है। मजबूत औद्योगिक नीति, उत्पादकता पर आधारित सुधार, मूल्य श्रृंखला में Input लागत का संतुलित प्रबंधन और उच्च मूल्य सेवाओं की समानांतर वृद्धि से दीर्घकालिक बाहरी स्थिरता और Currency की विश्वसनीयता को मजबूती मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती के बावजूद भारत ने FY25 में सकल निवेश प्रवाह के रूप में सकल घरेलू उत्पाद का 18.5 प्रतिशत आकर्षित किया। UNCTAD के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दक्षिण एशिया में सकल FDI प्रवाह का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा और इंडोनेशिया तथा वियतनाम जैसे एशियाई देशों को भी पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2024 में भारत Greenfield Investment घोषणाओं में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर रहा, जहां 1,000 से अधिक परियोजनाएं घोषित की गईं। वर्ष 2020-24 के दौरान भारत Greenfield Digital Investment के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बनकर उभरा और 114 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया।
April-November 2025 के दौरान सकल FDI प्रवाह बढ़कर 64.7 अरब डॉलर हो गया, जो April-November 2024 में 55.8 अरब डॉलर था। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि भारत में FPI प्रवाह में आवक और जावक का चक्र चलता रहता है, जो प्रायः वैश्विक वित्तीय परिवर्तनों से जुड़ा होता है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में छह महीने शुद्ध निकासी और तीन महीने शुद्ध निवेश दर्ज हुआ, जिससे कुल मिलाकर संतुलन सीमित रहा। देश का Foreign Exchange Reserve 16 January तक बढ़कर 701.4 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च अंत में 668 अरब डॉलर था। यह भंडार लगभग 11 महीने के वस्तु आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है और September 2025 के अंत तक बकाया External Debt का लगभग 94 प्रतिशत कवर करता है, जिससे पर्याप्त तरलता सुरक्षा मिलती है।
September 2025 के अंत तक भारत का कुल External Debt 746 अरब डॉलर रहा, जो March 2025 के अंत में 736.3 अरब डॉलर था। External Debt To GDP Ratio September 2025 के अंत में 19.2 प्रतिशत रहा। सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया कि कुल ऋण में बाहरी ऋण का हिस्सा 5 प्रतिशत से कम है, जिससे बाहरी क्षेत्र के जोखिम सीमित रहते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, किसी भी Currency का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि अर्थव्यवस्था घरेलू बचत उत्पन्न करने, बाहरी संतुलन बनाए रखने, स्थिर FDI आकर्षित करने और नवाचार, उत्पादकता तथा गुणवत्ता पर आधारित Export Competitiveness विकसित करने में कितनी सक्षम है।

