मुंबई,
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty में अगले सप्ताह भी दबाव और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों सूचकांक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तरों को मजबूती से पार नहीं कर लेते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, एमएससीआई सूचकांक के पुनर्संतुलन का प्रभाव शुक्रवार को कारोबार के अंतिम 30 मिनट में अधिक देखने को मिला, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा और अंतिम सत्र में तेज गिरावट दर्ज की गई। तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो Sensex अभी भी नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर रहा है। निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है और ऊंचे स्तरों पर खरीदारी में अपेक्षित मजबूती नहीं दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Sensex के लिए निकटतम प्रतिरोध 75,800 से 76,000 के क्षेत्र में मौजूद है। वहीं 76,500 से 76,700 का दायरा एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध और आपूर्ति क्षेत्र माना जा रहा है। यदि सूचकांक इन स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 74,500 से 74,200 का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान कर सकता है। बाजार के लिए इस स्तर के ऊपर बने रहना बेहद जरूरी होगा। यदि Sensex इस समर्थन क्षेत्र के नीचे फिसलता है तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है तथा सूचकांक निचले स्तरों की ओर जा सकता है।
Nifty के तकनीकी परिदृश्य पर बात करें तो यह अभी भी अपने 20-सप्ताह और 50-सप्ताह के घातीय मूविंग औसत से नीचे कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि बाजार में मजबूत तेजी का रुझान फिलहाल नहीं है। हालांकि, दीर्घकालिक ट्रेंडलाइन का समर्थन अभी भी बरकरार है, जिससे बाजार को कुछ मजबूती मिल रही है। विश्लेषकों के अनुसार, Nifty के लिए निकटतम प्रतिरोध स्तर 23,900 और 24,100 पर स्थित हैं। वहीं नीचे की ओर 23,400 और 23,200 के स्तर महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखे जा रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि Nifty 23,200 के स्तर से नीचे निर्णायक रूप से टूटता है तो नई बिकवाली देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि सूचकांक 24,100 के ऊपर लगातार कारोबार करता है तो निवेशकों की धारणा में सुधार आ सकता है और बाजार में रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है। इस बीच, पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने भारी गिरावट के साथ सप्ताह का समापन किया। कारोबार के अंतिम घंटे में तेज बिकवाली देखने को मिली। इसका प्रमुख कारण संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और एमएससीआई पुनर्संतुलन से जुड़ी अस्थिरता रही, जो शुक्रवार को बाजार बंद होने के साथ प्रभावी हुई।
कारोबार के अधिकांश समय तक Sensex और Nifty सीमित दायरे में बने रहे क्योंकि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बड़े निवेश से दूरी बनाए रखी। लेकिन सत्र के अंतिम चरण में बाजार की धारणा अचानक कमजोर हो गई, जिससे लगभग सभी क्षेत्रों में तेज बिकवाली शुरू हो गई। 30 शेयरों वाला Sensex 1,092 अंक या 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह लगभग 1,300 अंक तक लुढ़क गया था।
वहीं Nifty भी 359 अंक या 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 23,485 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और तकनीकी स्तर अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और महत्वपूर्ण समर्थन व प्रतिरोध स्तरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

