बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। इस वर्ष कश्मीर घाटी में केसर (सैफरन) के उत्पादन ने नई ऊर्जा के संकेत दिए हैं। विश्वभर में “रेड गोल्ड” के नाम से पहचानी जाने वाली यह महंगी और सुगंधित फसल अपनी खुशबू, रंग और औषधीय गुणों के कारण खास पहचान रखती है। उत्पादन में आए हालिया उछाल और कीमतों में मजबूती ने किसानों के चेहरों पर संतोष की मुस्कान ला दी है।
कश्मीर में केसर की खेती मुख्य रूप से पुलवामा, पांपोर, बडगाम, किश्तवाड़ और श्रीनगर में बड़े पैमाने पर की जाती है। इनमें पांपोर को “केसर नगर” के नाम से विशेष पहचान प्राप्त है। यहां की केसर अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग स्थान रखती है।
प्रदेश सरकार के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच केंद्र शासित प्रदेश में कुल 90.28 मीट्रिक टन केसर का उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि 80 मीट्रिक टन से अधिक केसर का निर्यात भी हुआ। जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्री जाविद अहमद डार ने बताया कि नेशनल मिशन ऑन सैफरन शुरू होने से पहले केसर की खेती गंभीर गिरावट के दौर से गुजर रही थी। वर्ष 2000-01 में उत्पादकता घटकर मात्र 1.27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई थी, जिससे किसानों की आय प्रभावित हुई थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में केसर उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन रहा। इसके बाद 2021-22 में 14.87 मीट्रिक टन और 2022-23 में 14.94 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। हालांकि 2023-24 में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया और उत्पादन 23.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 19.58 मीट्रिक टन रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्पादन में उतार-चढ़ाव के बावजूद हाल के वर्षों में सुधार के संकेत मिले हैं।
उत्पादन बढ़ने के साथ ही कीमतों में भी मजबूती देखी गई है। वर्तमान में केसर की कीमत 1.60 लाख रुपये से लेकर 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। ऊंची कीमतों और बेहतर बाजार मांग ने किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे उनके आर्थिक हालात में सुधार देखने को मिल रहा है।
हालांकि उत्पादन पूरी तरह मौसम पर निर्भर करता है। कश्मीर घाटी के केसर उत्पादक एजाज अहमद डार के अनुसार, केसर की फसल के लिए समय पर बारिश और पर्याप्त नमी आवश्यक है। यदि बारिश कम होती है तो उत्पादन प्रभावित होता है। बर्फबारी भी जमीन में नमी बनाए रखने में सहायक होती है, जो केसर की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है।
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और नेशनल मिशन ऑन सैफरन के तहत सिंचाई, बेहतर बीज और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता में सुधार की उम्मीद जगी है। कुल मिलाकर, केसर उत्पादन में हालिया उछाल ने कश्मीर के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। यदि मौसम का साथ और सरकारी सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में कश्मीर की केसर एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी चमक और मजबूती से उपस्थिति दर्ज करा सकती है।

