बिजनसे रेमेडीज/नई दिल्ली। देश का रियल एस्टेट सेक्टर फाइनेंशियल ईयर 2025 में 12 डील के जरिये 23,080 करोड़ रुपये की कैपिटल जुटाकर सात साल के हायर लेवल पर पहुंच गया। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई। इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म इक्विरस कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, FY 2018 से रियल एस्टेट सेक्टर में कुल फंड रेजिंग 72,331 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, इसमें रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट सेक्टर में सबसे आगे हैं, जिन्होंने 31,241 करोड़ रुपये जुटाए हैं। आरईआईटी के बाद लार्ज-कैप रियल एस्टेट फर्म ने 20,437 करोड़ रुपये, मिड-कैप रियल एस्टेट फर्म ने 12,496 करोड़ रुपये और स्मॉल-कैप कंपनियों ने 8,156 करोड़ रुपये जुटाए। आरईआईटी ने पिछले 12 महीने के दौरान 21.3 प्रतिशत का हायर रिटर्न हासिल किया, जो बाकी सभी रियल एस्टेट परिसंपत्ति वर्ग से आगे है। इसी अवधि के दौरान लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप रियल एस्टेट शेयर ने निगेटिव रिटर्न दिया। हालांकि, मार्च 2021 से रिटर्न के मामले में स्मॉल-कैप रियल एस्टेट शेयरों ने अन्य कंपनियों की मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसके बाद मिड-कैप शेयरों का नंबर ह। रिलीज में कहा गया कि लार्ज-कैप शेयरों ने इन क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन किया है, जिसमें आरईआईटी सबसे कम प्रदर्शन करने वाला इक्विटी इंस्ट्रूमेंट रहा है. इस महीने की शुरुआत में एनारॉक की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत का आरईआईटी इकोसिस्टम एक बड़े बदलाव के लिए तैयार है, क्योंकि विकास की अगली लहर रिटेल मॉल, शॉपिंग सेंटर और मिश्रित उपयोग वाले विकास से आ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत का रिटेल आरईआईटी बाजार 60,000-80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो अनुमानित 2 लाख करोड़ रुपये के आरईआईटी सेक्टर का करीब 30-40 प्रतिशत है। ट्रेंड में यह बदलाव मैच्योर इकोनॉमी के अनुरूप होगा, जहां रिटेल रीट्स कुल आरईआईटी बाजार पूंजीकरण का 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इंस्टीट्यूशन प्लेयर इंदौर, कोयंबटूर, सूरत, भुवनेश्वर और चंडीगढ़ जैसे टियर-2 शहरों के हाई-इनकम, कंजप्शन ड्रिवन क्लस्टर में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। सेबी ने हाल ही में विविधीकरण के अवसरों को बढ़ाने और एक निवेश योग्य परिसंपत्ति वर्ग के रूप में रियल एस्टेट के विकास को समर्थन देने के लिए म्यूचुअल फंड निवेश के लिए रीट्स को ‘इक्विटी’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया है।




