भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच अभी नीतिगत ब्याज दरों में सख्ती की कोई जल्दबाज़ी देखने को नहीं मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल सतर्क रुख बनाए हुए है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले महीने कहा था कि केंद्रीय बैंक पश्चिम एशिया संघर्ष के असर पर लगातार नज़र रख रहा है और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा को लेकर अभी कोई ठोस संकेत देना जल्दबाज़ी होगी। उन्होंने साफ किया कि केंद्रीय बैंक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है और जल्द किसी बड़े फैसले की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव के अनुसार अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले महीने यह3.4प्रतिशत थी। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में औसत महंगाई दर लगभग 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि महंगाई अब भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित लक्ष्य के मध्य स्तर के करीब पहुंच रही है।
खाद्य महंगाई दर में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि यह बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि पहले यह3.7प्रतिशत थी। टमाटर, अंडे, खाद्यान्न और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण मानी जा रही है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने भी खाद्य आपूर्ति पर असर डाला है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वहीं मुख्य महंगाई दर लगभग 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी के कारण इसमें अधिक बढ़ोतरी नहीं दिख रही है। हालांकि विमान ईंधन की कीमतों और होटल-रेस्तरां क्षेत्र में वाणिज्यिक रसोई गैस की लागत बढ़ने से परिवहन और सेवा क्षेत्र में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर अभी पूरी तरह खुदरा बाजार तक नहीं पहुंचा है क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। बाजार की निगाहें अल नीनो की स्थिति और मानसून की मजबूती पर भी बनी हुई हैं क्योंकि कमजोर मानसून खाद्य महंगाई को और बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ने और कमजोर रुपये के कारण थोक महंगाई दर में तेजी अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकती है। मार्च महीने में थोक महंगाई दर खुदरा महंगाई से आगे निकल चुकी थी और अप्रैल में भी इसमें बढ़ोतरी जारी रहने का अनुमान है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल की बैठक में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था और अपना रुख तटस्थ बनाए रखा। उद्योग संगठन एसोचैम ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि यह कदम व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने और विकास की रफ्तार बनाए रखने में मदद करेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि आगे ब्याज दरों में कटौती की संभावना अब कमजोर पड़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अल नीनो को महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बताया है। साथ ही चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत और महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

