Sunday, June 14, 2026 |
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RBI ब्याज दरों में फिलहाल बदलाव नहीं कर सकता, महंगाई को लेकर रुख हो सकता है और सख्त

by Business Remedies
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RBI expected to keep interest rates unchanged amid rising inflation and crude oil prices in India

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है। हालांकि, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और कमजोर होते रुपये के कारण महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख पहले की तुलना में अधिक सख्त दिखाई दे सकता है। यह अनुमान एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री एवं व्यापक आर्थिक रणनीतिकार प्रांजुल भंडारी ने व्यक्त किया है।

प्रांजुल भंडारी के अनुसार, RBI द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना कम है। इसके बजाय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही से धीरे-धीरे सख्ती का दौर शुरू हो सकता है, जिसमें लगभग 2 बार ब्याज दरों में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि RBI द्वारा जारी किए जाने वाले अद्यतन आर्थिक अनुमान यह स्पष्ट करेंगे कि नीति निर्माता मौजूदा ऊर्जा संकट के प्रभाव को किस नजरिए से देख रहे हैं। पिछली मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने कच्चे तेल की कीमत का आधार अनुमान लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल रखा था, जबकि वैकल्पिक परिदृश्य में इसे 95 डॉलर प्रति बैरल माना गया था।

अब एचएसबीसी का मानना है कि RBI अपने आधार अनुमान में कच्चे तेल की ऊंची कीमत को शामिल कर सकता है। इससे महंगाई का अनुमान बढ़कर लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसे 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। प्रांजुल भंडारी ने कहा कि एक ओर महंगाई बढ़ रही है, जिससे ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत महसूस होती है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जो दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ संकेत देती है। उनके अनुसार किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में से एक होती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऊंची तेल कीमतें और संभावित अल नीनो की स्थिति आर्थिक वृद्धि, महंगाई नियंत्रण, राजकोषीय घाटे और चालू खाते के संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। वहीं, केयरएज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य से कम मानसून और खुदरा ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण महंगाई संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में तेज वृद्धि उपभोक्ता कीमतों पर भी जल्द प्रभाव डाल सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान महंगाई मुख्य रूप से आपूर्ति संबंधी झटकों का परिणाम है, न कि मांग में बढ़ोतरी का। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव उत्पादन और आपूर्ति पक्ष से उत्पन्न हो रहा है। केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहे। हालांकि यदि वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो आर्थिक वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है।



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