Monday, July 6, 2026 |
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बैंकों और बीमा कंपनियों को Commodity Derivatives में प्रवेश पर RBI और IRDAI की असहमति: SEBI प्रमुख

by Business Remedies
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SEBI Chief Speaking On RBI And IRDAI Decision Regarding Commodity Derivatives

मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान SEBI के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने स्पष्ट किया कि RBI और IRDAI फिलहाल बैंकों और बीमा कंपनियों को Commodity Derivatives बाजार में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नियामकों के पास इस विषय पर ठोस और उचित कारण हैं, जिसके चलते वे इस क्षेत्र में भागीदारी को लेकर सहमत नहीं हैं। पांडेय के अनुसार, बीमा क्षेत्र विशेष रूप से दीर्घकालिक निवेश पर आधारित होता है, जबकि Commodity Derivatives का स्वभाव अपेक्षाकृत अल्पकालिक और जोखिमपूर्ण होता है। ऐसे में यह चिंता बनी हुई है कि इस प्रकार के निवेश बीमा कंपनियों की दीर्घकालिक रणनीति के साथ कैसे संतुलन बनाएंगे।

उन्होंने बताया कि SEBI द्वारा जब इस विषय पर RBI और IRDAI के साथ चर्चा की गई, तो वहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। दोनों संस्थानों ने बाजार की जटिलताओं और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों पर भी पांडेय ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आधुनिक Algorithms मानव नियंत्रण से कहीं अधिक तेजी से कार्य कर सकते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा Digital Platforms धोखाधड़ी के माध्यम भी बन सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नई पीढ़ी के AI Tools जहां एक ओर सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने में सहायक हैं, वहीं दूसरी ओर उनका दुरुपयोग कर बड़े स्तर पर नुकसान भी पहुंचाया जा सकता है।

CKYC 2.0 परियोजना की प्रगति पर उन्होंने कहा कि यह पहल फिलहाल विकास के चरण में है। इसका उद्देश्य पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए एकीकृत KYC प्रणाली तैयार करना है। इस परियोजना का नेतृत्व CERSAI कर रहा है और इसमें विभिन्न नियामकों का सहयोग लिया जा रहा है। SEBI ने हाल ही में CERSAI के साथ बैठक कर प्रमुख चुनौतियों की पहचान की है और उम्मीद जताई है कि जुलाई के अंत तक इसका प्रारूप तैयार हो सकता है। इससे पहले April 17 को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में पांडेय ने कहा था कि भारत के पूंजी बाजार अब वैश्विक स्तर पर स्थिर और मजबूत निवेश विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार और लगातार बढ़ते निवेशक वर्ग के कारण भारतीय बाजार वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।



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