New Delhi,
India के रियल एस्टेट क्षेत्र में 2026 की पहली तिमाही में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। Q1 2026 में कुल लेनदेन $1.7 Billion तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में निवेश के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। Core संपत्तियों की खरीद में तेज़ उछाल दर्ज किया गया, जो बढ़कर $1.03 Billion हो गया। इसमें 178 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि निवेशक अब ऐसी संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो स्थिर आय प्रदान करती हैं। दूसरी तिमाही में भी यही रुझान जारी है। अब तक Core संपत्तियों में सौदे $1.48 Billion तक पहुंच चुके हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में भरोसा बना हुआ है और निवेशक दीर्घकालिक स्थिरता को महत्व दे रहे हैं।
JLL India की वरिष्ठ प्रबंध निदेशक Lata Pillai ने बताया कि दफ्तर क्षेत्र की मजबूती और नियमित आय देने वाली संपत्तियों की मांग इस वृद्धि का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक भी लेनदेन पूरा कर रहे हैं, जिससे बाजार में सक्रियता बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद India का निवेश बाजार मजबूती दिखा रहा है और 2026 में भी यह गति बनी रहने की संभावना है।
रियल एस्टेट क्षेत्र ने 2024 और 2025 में भी शानदार प्रदर्शन किया था। इन दोनों वर्षों में कुल संस्थागत निवेश $19.4 Billion रहा, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 2025 में एक बड़ा बदलाव यह रहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली। यह 2014 के बाद पहली बार हुआ है जब घरेलू निवेशकों ने बढ़त बनाई। इससे पहले 2015 से 2024 तक विदेशी निवेशकों का वर्चस्व था।
Q1 2026 में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी और बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई, जो उनकी मजबूत भूमिका को दर्शाती है। India के REITs और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन्होंने मिलकर $2.8 Billion का निवेश किया, जो कुल घरेलू निवेश का 47 प्रतिशत है।
इसके अलावा Indian Private Equity कंपनियों ने भी 42 प्रतिशत योगदान देकर इस विकास को आगे बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक आधार, बढ़ता बुनियादी ढांचा और सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में India की पहचान इस क्षेत्र को आगे भी गति देती रहेगी।

