Monday, July 6, 2026 |
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RBI ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने अमेरिका के जवाबी शुल्क को लेकर चिंता के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के मकसद से बुधवार को लगातार दूसरी बार प्रमुख ब्याज दर रेपो को 0.25 प्रतिशत घटाकर छह प्रतिशत कर दिया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने रुख को ‘तटस्थ’ से ‘उदार’ करते हुए आने वाले समय में ब्याज दर में एक और कटौती का संकेत दिया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है।

चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय किया है।’’ एमपीसी में तीन सदस्य केंद्रीय बैंक से, जबकि तीन सदस्य बाहर से होते हैं। मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘उदार’ कर दिया है। इसका मतलब है कि आरबीआई आने वाले समय में जरूरत पडऩे पर नीतिगत दर में और कटौती कर सकता है। रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये इस दर का उपयोग करता है। रेपो दर में कमी करने का मतलब है कि मकान, वाहन समेत विभिन्न कर्जों पर मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने इससे पहले इस साल फरवरी में मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर 6.25 प्रतिशत कर दिया था। यह मई, 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था। मुद्रास्फीति में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच इस कदम से नवंबर, 2022 के बाद से कर्ज की लागत सबसे कम स्तर पर आ गई है। आरबीआई ने नीतिगत दर में कटौती ऐसे समय की है, जब अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पादों पर २७ प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लागू हुआ है। अमेरिकी शुल्क से अनिश्चितताएं बढ़ी हैं और कुछ अर्थशास्त्रियों ने एक अप्रैल से शुरू हुए चालू वित्त वर्ष में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि में 0.2 से 0.4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। आरबीआई ने भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा मुद्रास्फीति के अनुमान को भी 4.2 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत कर दिया है। इससे खुदरा महंगाई का अनुमान आरबीआई के लक्ष्य के अनुरूप आ गया है।

आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो महामारी के बाद वृद्धि का सबसे कमजोर स्तर है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘हाल ही में अमेरिकी शुल्क की घोषणा ने अनिश्चितताओं को बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक वृद्धि और मुद्रास्फीति के लिए नई बाधाएं पैदा हुई हैं।’

 

 

 

बढ़ेगी ऑटो सेक्टर की रफ्तार
रेपो रेट में 25 बीपीएस की कटौती, महंगाई में नरमी और सकारात्मक नीति संकेत ऑटो सेक्टर के लिए अनुकूल हैं। इससे एंट्री-लेवल और मिड-साइज वाहनों की मांग बढ़ेगी। ईएमआई घटने से उपभोक्ता की किफायत बढ़ेगी। शून्य कर नीति के साथ यह शहरी और ग्रामीण मांग को बल देगा। फ्लीट ऑपरेटर्स को भी सस्ती फाइनेंसिंग से बेड़े विस्तार में मदद मिलेगी।
-वेंकटराम मामिल्लापल्ले, कंट्री सीईओ और एमडी, रेनो इंडिया

 

क्रेडिट उपलब्धता में होगा सुधार
रेपो रेट में 25 बीपीएस कटौती और उदार मौद्रिक रुख भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच समर्थन देने का रणनीतिक कदम है। इससे क्रेडिट उपलब्धता बेहतर होगी और उधारी की लागत घटेगी। MSME और हाउसिंग सेक्टर को लाभ मिलेगा। उपभोक्ता भावना में सुधार से खर्च और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम समावेशी और सतत विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगा।
-राजेश शर्मा, मैनेजिंग डायरेक्टर, कैप्री ग्लोबल कैपिटल लिमिटेड

 

 

अर्थव्यवस्था में ऋण गति को मिलेगा समर्थन
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली मौद्रिक नीति में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 6% करने और ‘समायोज्य’ रुख अपनाने का आरबीआई का निर्णय ऋण गति को समर्थन देने वाला है। यह कदम मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और ऋण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देने के साथ-साथ सतत आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए अनुकूल माहौल बनाएगा।
-राजेंद्र कुमार सेतिया, प्रबंध निदेशक और सीईओ, एसके फाइनेंस लिमिटेड



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