Thursday, February 26, 2026 |
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भारतीय कंपनियों में कार्यस्थल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तेज विस्तार

91 प्रतिशत फर्म कर रहीं पायलट परीक्षण

by Business Remedies
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Artificial Intelligence based work system scenario in Indian office

बेंगलुरु,

भारतीय कंपनियों में कार्यस्थल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार अब 91 प्रतिशत भारतीय कंपनियां दफ्तरों और कार्यस्थल से जुड़े प्रयोगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का पायलट परीक्षण कर रही हैं। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 5 प्रतिशत से भी कम था, जिससे स्पष्ट है कि दो वर्षों में इसमें बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट के मुताबिक कॉरपोरेट रियल एस्टेट टीम, जो कार्यालय स्थान, कार्य संचालन और लोकेशन रणनीति संभालती हैं, उनके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल एक रोचक विषय नहीं बल्कि अत्यावश्यक आवश्यकता बन गई है। कंपनियां लागत घटाने और स्थान के बेहतर उपयोग के लिए इस तकनीक को तेजी से अपना रही हैं।

जेएलएल के पश्चिम एशिया क्षेत्र में कार्य संचालन खातों के प्रबंध निदेशक अजीत कुमार ने कहा कि भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की रफ्तार दो वर्षों में 18 गुना बढ़ी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती वास्तविक बचत और कार्य निष्पादन में ठोस सुधार को साबित करना है। उनके अनुसार जो कंपनियां स्पष्ट लक्ष्य तय करेंगी, आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारेंगी और पुरानी प्रणालियों को उन्नत करेंगी, वही आगे बढ़ सकेंगी, जबकि अन्य कंपनियां पीछे रह सकती हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि भले ही भारतीय कार्यस्थलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक परीक्षण हो रहा है, लेकिन इसे दैनिक संचालन में बड़े पैमाने पर लागू करना अभी भी कठिन साबित हो रहा है। कई कंपनियां प्रयोग कर रही हैं, परंतु व्यवस्थित और समन्वित क्रियान्वयन अभी प्रक्रिया में है।

वैश्विक कंपनियां जब भारत में अपने कार्यालयों की रणनीति और हाइब्रिड कार्य नीति की समीक्षा कर रही हैं, तब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर तात्कालिकता और बढ़ गई है। समझदारी से कार्यालय स्थान तय कर लागत कम करना अब निदेशक मंडल की प्राथमिकता बन चुका है। 93 प्रतिशत वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे प्रमुख व्यावसायिक लक्ष्य माना है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक लगभग 33 प्रतिशत कार्यस्थल रियल एस्टेट प्रमुख सीधे मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी को रिपोर्ट कर सकते हैं, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा 16 प्रतिशत है। यह संकेत देता है कि कार्यालयों को स्थिर परिसंपत्ति के बजाय तकनीक आधारित मंच के रूप में संचालित करने की दिशा में बदलाव हो रहा है।

हालांकि पुराना बुनियादी ढांचा अब भी बड़ी बाधा बना हुआ है। अध्ययन में पाया गया कि 57 प्रतिशत संगठनों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए स्पष्ट रणनीति नहीं है, जिससे बिखरे हुए पायलट प्रोजेक्ट तो चल रहे हैं, पर समन्वित योजना का अभाव है। लगभग 29 प्रतिशत संगठनों को प्रौद्योगिकी रणनीति से जुड़े कुशल कर्मियों की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है, जिससे क्रियान्वयन की गति धीमी हो रही है। जेएलएल के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान प्रमुख डॉ. समंतक दास ने कहा कि कई संगठन पुरानी और असंबद्ध तकनीकी प्रणालियों पर उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 93 प्रतिशत कंपनियां अब अपनी पुरानी प्रणालियों को उन्नत करने के लिए बजट आवंटित कर रही हैं, जिनमें से 58 प्रतिशत इसे रणनीतिक प्राथमिकता मान रही हैं।



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