बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली | हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय के भव्य सभागार में वार्षिक सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक महोत्सव “अभ्युदय 2026” का आयोजन अत्यंत गरिमा, आध्यात्मिक उल्लास और राष्ट्रगौरव के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के सजीव समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा। इस वर्ष अभ्युदय कार्यक्रम की थीम “योगधर्म से युगधर्म” रही। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। पतंजलि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ‘योगधर्म से युगधर्म’ नाट्य प्रस्तुति प्रस्तुत कर कार्यक्रम में पधारे गणमान्य अतिथियों का मन मोह लिया।
इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सब उस पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हैं जो पूरी दुनिया का संस्कृति का सबसे ब?ा केंद्र है। आप सभी इस ऋषि संस्कृति के ध्वजवाहक बनकर इस अनुष्ठान को आगे ब?ा रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि जिन संकल्पों को लेकर हम जी रहे हैं, वे संकल्प आप आप सबके भीतर मूर्त रूप ले रहे हैं। नाट्य प्रस्तुति देखकर स्वामी जी ने कहा कि आज एक षड्यंत्र के तहत विश्वगुरु भारत को लेकर कई भ्रामक रील्स चल रही हैं, लेकिन भारत विश्वगुरु था, है और हमेशा विश्वगुरु रहेगा। वो शक्ति, शौर्य, वीरता, पराक्रम और हृदय की विकल्ता कि विकल्प रहित संकल्प, अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ, ब?ी सोच, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे के साथ चरैवेति-चरैवेति हम आगे ब?ेंगे और भारत को इसका खोया हुआ गौरव दिलाकर रहेंगे। यह मात्र नाटक नहीं अपितु इन विद्यार्थियों के जीवन का यथार्थ है। ये उस यथार्थ के, धर्म के, अध्यात्म के, संस्कृति व संस्कारों के जीवंत विग्रहवान स्वरूप हैं। जब मैं इन विद्यार्थियों के जीवन का आचरण और अभिनय देखता हूँ तो मेरा हृदय आशा और विश्वास से भर जाता है कि जिसके लिए हमने विगत 50 वर्षों से तप किया है, वह तप आपमें फलीभूत हो रहा है। हमें पूरा विश्ववास है कि हमारे पतंजलि के बालक कभी भी अपने चरित्र से नहीं गिर सकते, यह हमारा आत्मबल, वेदबल व ब्रह्मबल है। यह हमारा रामत्व, कृष्णत्व, हमनुत्व, शिवतत्व व गुरु तत्व है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परमार्थ आश्रम, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द मुनि महाराज ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय एक अद्वितीय साधना-स्थली है। योग केवल वैश्विक लोकप्रियता का विषय नहीं है, यह राष्ट्र निर्माण का आधार है। पतंजलि विश्वविद्यालय एक संकल्प है जिसमें स्वामी रामदेव महाराज व आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का तप निहित है। यह तो अभी शुरूआत है, यह यात्रा बहुत लम्बी चलेगी। उन्होंने कहा कि जो मजाक बनाते हैं वे मैजिक नहीं कर सकते, पतंजलि विश्वविद्यालय एक मैजिक है।
ऋषिकेश से आध्यात्मिक मार्गदर्शिका साध्वी भगवती सरस्वती कहा कि मैं आज आपके बीच में आकर इतनी प्रभावित हुई हूँ। उन्होने कहा मैं भगवान से कहना चाहूंगी कि मुझे लम्बी आयु तक जीवित रखें, क्योंकि आप लोग जो दुनियां संस्कृत, संस्कृति, सनातन, गुरु कृपा से बनायेंगे। मैं उसका दर्शन करना चाहती हूँ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी ने नाट्य प्रस्तुति के सफल आयोजन हेतु साध्वी देवप्रिया जी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस नाट्य प्रस्तुति के सफल आयोजन में साध्वी जी ने कुशल नेतृत्व किया है। साथ ही उन्होंने इस नाटक के लेखन, प्रशिक्षकों की टीम तथा अभिनय करने वाले विद्यार्थियों का परिचय कराते हुए उनका भी आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि नाट्य प्रस्तुति देखकर मैं अभिभूत हो गया। इस प्रस्तुति में मैंने नवरस का अनुभव किया। वर्तमान का विभत्स दृश्य भी देखा, पुराना पुण्य काल का, धर्म जीवन एक अद्भुत रस भी देखा। इस प्रस्तुति में मैंने स्वामी जी महाराज का विश्व रूप देखा। इस सभा में नृत्य शास्त्र, व्याकरण शास्त्र, साहित्य शास्त्र, वेद शास्त्र, पुराण व इतिहास के विद्वान हैं, लेकिन सभी एक-एक शास्त्र में निष्णात हैं। स्वामी महाराज योग शास्त्र में निष्णात होने के कारण सभी शास्त्रों में निष्णात हैं। शब्द के साथ अर्थ का जोड़ हमने देखा है लेकिन आज यहाँ शब्द, अर्थ के साथ धर्म का भी जोड़ हम सबने देखा है। यह पतंजलि परिवार का मेगा-शो है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा कि नाट्य प्रस्तुति ‘योगधर्म से युगधर्म’ में हमने सतयुग से लेकर कलयुग तक संस्कृति संवर्धन का पूरा प्रवाह देखा, नृत्य और संगीत के समन्वय से ऐसी प्रस्तुति देखकर मैं बिल्कुल भाव विभोर हूँ। लग रहा है कि हम विश्वगुरु थे, हैं और विश्वगुरु रहेंगे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. बृजभूषण ओझा ने कहा कि भारत अवश्य ही पुन: विश्वगुरु बनेगा और विश्वगुरु बनने के लिए जिस समर्थ गुरु की आवश्यकता है वह पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के रूप में हमारे पास हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षा का जब तह व्यवहारिक व प्रायोगिक रूप नहीं आएगा तब तक उसकी पूजा नहीं होगी। योग व आयुर्वेद का व्यवहारिक व प्रायोगिक रूप हमारे स्वामी जी महाराज व आचार्य महाराज हैं। सनातन संस्कृति के उद्घोषक महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि इन दोनों महापुरुषों ने योग-आयुर्वेद को विश्व पटल पर पहुँचाया। स्वामी जी, आचार्य जी में वह पुरुषार्थ है जो मरूस्थल से भी पानी निकाल सके। पतंजलि विश्वविद्यालय की कुलानुशासिका एवं मानविकी संकायाध्यक्षा साध्वी देवप्रिया ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय के होनहार छात्र-छात्राएँ स्वामी जी महाराज व आचार्य जी महाराज से प्रेरणा पाकर जीवन के सूत्रों को सीख रहे हैं तथा अपने जीवन में ऊर्ध्व आरोहण कर रहे हैं।

