Friday, July 3, 2026 |
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श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी आज परशुराम जयंती

by Business Remedies
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हर साल की तरह आज देशभर में परशुराम जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। भगवान परशुरामजी को आवेश अवतार माना जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान परशुरामजी की कई ऐसी कथाओं का वर्णन मिलता है जिससे मालूम होता है कि परशुरामजी अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे। साथ ही कथाओं से मालूम होता है कि परशुरामजी अमर हैं और सृष्टि के अंत तक वह धरती पर विराजमान रहेंगे। भगवान परशुरामजी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र हैं। परशुरामजी कुल परंपरा के अनुसार ब्राह्मण हैं लेकिन इनका स्वभाव क्षत्रिय जैसा है। अपने क्रोध से इन्होंने कई बार धरती पर क्षत्रियों का विनाश कर दिया। लेकिन इनका स्वभाव क्रोधी कैसे हुआ? इस विषय में एक कथा है कि, इनकी दादी सत्यवती को भृगु ऋषि ने दो फल दिए थे, जिनमें एक इनकी दादी सत्यवती के लिए था और दूसरा फल इनकी दादी की माता के लिए था। लेकिन गलती से फलों में अदला बदली हो गई। इससे भृगु ऋषि ने सत्यवती से कहा कि तुम्हरा पुत्र क्षत्रिय स्वभाव का होगा। तो सत्यवती ने भृगु ऋषि से कहा कि ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे कि मेरा पुत्र ब्राह्मण जैसा हो और मेरा पौत्र क्षत्रिय गुणों वाला हो। भृगु ऋषि के आशीर्वाद से ऐसा ही हुआ परशुरामजी ऋषि जमदग्नि की पांचवी संतान हुए जो बाल्यावस्था से ही क्रोधी स्वभाव के थे। वैसे भगवान परशुरामजी का मूल नाम राम है। इन्हें ऋषि जमगग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य भी कहा जाता है। लेकिन यह परशुरामजी के नाम से अधिक विख्यात हैं। परशुरामजी भगवान शिव के भक्त और शिष्य भी हैं। इनकी भक्ति, योग्यता को देखते हुए भगवान शिवजी ने इन्हें विद्युदभि नामक अपना परशु प्रदान किया था। सदैव परशु धारण करने के कारण यह जगत में परशुराम नाम से विख्यात हैं।



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