भारत के रिन्यूएबल सेक्टर में निवेश और रोजगार पर पड़ेगा असर
नई टैरिफ नीति से चीन की जगह लेने की संभावनाओं पर पड़ेगा प्रभाव
बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। अमेरीका ने हाल ही में नई व्यापार नीति के तहत दुनिया के कई देशों पर नया टैरिफ लागू किया है।इस टैरिफ से कई देशों में हडक़ंप मचा हुआ है। इनमें देशों में भारत भी शामिल है। 2 अप्रैल 2025 को अमेरीका ने “Reciprocal Tariff” नीति के तहत भारत सहित कई देशों पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह टैरिफ उन देशों पर लागू होता है जो अमरीकी उत्पादों पर ज्यादा शुल्क लगाते हैं। इसका सीधा असर भारत के सौर ऊर्जा निर्यात, विशेषकर अमेरीका को भेजे जाने वाले उत्पादों पर पड़ा है।
अमेरीका द्वारा लगाया गया 26 प्रतिशत टैरिफ भारत के लिए एक चुनौती भी है और अवसर भी। अगर चीन पीछे हटता है और भारत नीतिगत व तकनीकी सुधार करता है तो भारत वैश्विक सोलर मार्केट में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर इस मौके का रणनीतिक रूप से उपयोग करना चाहिए।
भारत से अमेरीका को कितनी मात्रा में अक्षय ऊर्जा सिस्टम भेजे जाते हैं?
1. भारत सालाना लगभग 5 जीडब्ल्यू (गीगावॉट) के सोलर मॉड्यूल और सेल्स अमेरीका को निर्यात करता है।
2. 2023 में भारत ने अमेरीका को 15,000 करोड़ (लगभग 1.8 बिलियन डॉलर) का सोलर उत्पाद निर्यात किया।
3. भारत, अमेरीका को सोलर के क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
अमेरीका को कौन-कौन से सौर उत्पाद भेजे जाते हैं?
भारत से अमेरीका को भेजे जाने वाले प्रमुख सौर उत्पाद :
1. सोलर मॉड्यूल्स
2. सोलर सेल्स
3. एल्यूमिनियम फ्रेम्स और स्ट्रक्चर्स
4. बैकशीट और इन्वर्टर सिस्टम्स
5. लीड फ्री सोल्डर व ग्रीन सोलर मटेरियल।
भारत पर प्रभाव जब चीन अमेरीका को सौर मैटेरियल देना बंद कर दे
1. चीन अमेरीका को सौर उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक है।
यदि चीन ने अमरीका को आपूर्ति रोक दी तो
अ. भारत के लिए यह बड़ा अवसर बन सकता है।
ब. इससे भारत का सौर निर्यात दो से तीन साल में १ लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।
लेकिन अब 26 प्रतिशत टैरिफ के कारण यह अवसर भी प्रभावित हो सकता है।
26 प्रतिशत टैरिफ के बाद संभावित प्रभाव
भारतीय उत्पाद अमरीका में 26 प्रतिशत महंगे हो जाएंगे, जिससे :-
1. मांग में कमी आएगी।
2. भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता घटेगी।
3. निर्यात घटकर 10,000 करोड़ से भी कम हो सकता है।
इससे भारत के रिन्यूएबल सेक्टर में निवेश और रोजगार पर असर पड़ेगा।
समाधान और सुझाव
1. नए बाजारों की खोज : यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे नए बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
2. स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा : घरेलू सौर ऊर्जा परियोजनाओं में मेक इन इंडिया पहल के तहत स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहित करना।
3. सरकारी समर्थन : सरकार को निर्यातकों के लिए सब्सिडी, कर छूट और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करने चाहिए ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
4. तकनीकी नवाचार : उत्पादों की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
– कुल निर्यात पर प्रभाव: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात में कुल मिलाकर 3-3.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
– अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव : सौर ऊर्जा के अलावा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी इन टैरिफ का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
जैसे अभी टैरिफ की घोषणाएं हुई हैं, उससे पूरी इंडस्ट्री डरी हुई है। टैरिफ कुछ अवसर भी लेकर आ रहा है तो कुछ नुकसान भी हो रहा है। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे ही क्लियर होता जाएगा। अभी भारत का 90 प्रतिशत रिन्यूएबल सेक्टर का एक्सपोर्ट सिर्फ अमेरिका को हो रहा है। तो यह हमारी चिंता भी बढ़ाता है, लेकिन जिस तरह से हम चीन पर शिकंजा कस रहे है, वह हमारे लिए एक फायदेमंद मौके की तरह हो सकता है।
– नितिन अग्रवाल,
सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन

