New Delhi,
देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार को लेकर व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यदि इस क्षेत्र को बिना किसी ठोस नियम के छोड़ दिया गया, तो यह देश के पारंपरिक खुदरा व्यापार ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जो रोजगार और स्वरोजगार का एक बड़ा स्रोत है। कैट ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द एक मजबूत और प्रभावी National E-Commerce Policy लागू की जाए, जिससे करोड़ों छोटे व्यापारियों, मोहल्ला दुकानों और उनसे जुड़े कर्मचारियों के जीवन-यापन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सरकार को पत्र लिखकर उठाई मांग
कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने डेलॉयट और गूगल की संयुक्त रिपोर्ट “द 250 बिलियन कॉमर्स फ्रंटियर” का हवाला देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट भारत के डिजिटल व्यापार बाजार के बड़े विस्तार को दिखाती है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट करती है कि संतुलित विकास और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए नीतिगत सुरक्षा बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्ष 2019 से 2025 के बीच लगभग 90 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और वर्ष 2030 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा, वर्ष 2030 तक 22 करोड़ नए युवा ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ेंगे, जो कुल ऑनलाइन खर्च का 45 प्रतिशत हिस्सा होंगे। साथ ही 15 करोड़ नए उपभोक्ता भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आएंगे और प्रति व्यक्ति ऑनलाइन खर्च दोगुना होने की संभावना है।
छोटे शहरों की बढ़ती भागीदारी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि टियर-2 शहरों और छोटे कस्बों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में कुल ऑनलाइन ग्राहकों में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी इन क्षेत्रों की है, जो कुल खर्च और ऑर्डर में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कैट ने सरकार से मांग की है कि नई National E-Commerce Policy में विदेशी निवेश नियमों का सख्ती से पालन, अनुचित मूल्य निर्धारण पर रोक, डार्क स्टोर पर नियंत्रण, एल्गोरिदम में पारदर्शिता, विक्रेताओं की निष्पक्ष रैंकिंग, नकली और घटिया सामान पर सख्त कार्रवाई, छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर, डाटा सुरक्षा और शिकायत निवारण की मजबूत व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल किए जाएं।
पारंपरिक व्यापार पर खतरे की आशंका
संगठन ने कहा कि देश के छोटे खुदरा व्यापारी, किराना स्टोर, थोक व्यापारी, वितरक और परिवहन क्षेत्र करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। यदि इस व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, तो इसके गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने आरोप लगाया कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां विदेशी निवेश नीति की भावना का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष रूप से माल का स्वामित्व, चुनिंदा विक्रेताओं को बढ़ावा, निजी ब्रांड और जटिल व्यापारिक ढांचे के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुचित मूल्य निर्धारण, भारी छूट, डार्क स्टोर, पक्षपातपूर्ण लिस्टिंग और घटिया उत्पादों की आपूर्ति जैसी प्रवृत्तियां अब आम हो गई हैं। ये तरीके न केवल प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ईमानदार व्यापारियों को धीरे-धीरे बाजार से बाहर कर रहे हैं।

