शादियों का सीजन आखातीज से यानि 19 अप्रैल से शुरू होने वाला है, लेकिन लोग अभी सोने, चांदी व हीरे के जेवरात लेने से कतरा रहे हैं। दुकानदार शादियों के सीजन में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। मार्केट में पहले की अपेक्षा रौनक कम दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण इनकी कीमतें ज्यादा होना है। फिलहाल लोग शादी-विवाह के लिए खरीददारी तो कर रहे हैं, पर लाइट वेट की ज्वैलरी लेना पसंद कर रहे हैं। सीजफायर के बाद भी वार्ता सफल नहीं होने के कारण मिडिल ईस्ट तनाव अब भी बरकरार है। इसके अलावा ट्रंप टैरिफ से भारत का ज्वैलरी उद्योग गड़बड़ा गया है। भारत का करीब 30 फीसदी से अधिक एक्सपोर्ट इसी सेक्टर्स से होता है। तनाव के कारण सोने और कच्चे हीरे की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जहां लॉजिस्टिक्स और शिपमेंट रुकने से व्यापार ठप हो गया है। निर्यातक ज्वैलरी को दूसरे देशों में भेज नहीं पा रहे हैं। जब तक तनाव कम नहीं होता तब तक नहीं लगता कि ज्वैलरी मार्केट में उठाव आ पाएगा। भारत के कुछ निर्यातक दुबई के रास्ते भी अपने माल को भेजने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि निर्यातकों का दूसरे देशों से अच्छा फायदा मिल सके। निर्यातक तनाव रहने तक चीन, हॉन्गकॉन्ग व अन्य देशों के बाजारों से कुछ हद तक इसकी भरपाई करने की उम्मीद जता रहे हैं। आने वाले समय में यह भरपाई पूरी होने पर निर्यातकों को इसका फायदा भी मिल सकता है।

