Monday, July 13, 2026 |
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सृजनात्मक सोच करती है जीवन का निर्माण: जैनाचार्य प्रवर विजयराज महाराज

साधु-संतों, साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं के संग निकली चातुर्मासिक प्रवेश विहार यात्रा में उमड़ा जन सैलाब

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। संयम सुमेरु जैनाचार्य प्रवर विजयराज महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भारतीय संस्कृति ऋषि प्रधान और कृषि प्रधान होने के कारण ही जीवन निर्वाण करने को सक्षम बनाती है, जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं है। वहां केवल कृषि प्रधान ही है, ऋषि प्रधानता बिल्कुल नहीं है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति की अपनी विशिष्ट विशेषताएं और महत्व है। यह संस्कृति ना केवल अपनी प्राचीनता और समृद्धि के लिए जानी जाती है, बल्कि अपने मूल्यों और आदर्शों के लिए भी प्रसिद्ध है। महाराजश्री ने पशु-पक्षी और मानव के सोचने और समझने की शक्ति के संबंध में कहा कि पशु-पक्षियों में सोचने और समझने की कोई योग्यता नहीं होती है, जबकि मानव में यह विद्यमान रहती है। अगर मानव की सोच सकारात्मक रहती है तो वह स्वर्ग के सामान अनुभूति करने लायक रहेगी, वहीं उसकी सोच अगर नकारात्मक है तो वह नरक जैसी यानि की नारकीय जीवन की ओर प्रेरित करेगी। इसलिए हरेक मानव को अपनी सोच पर चिंतन करना चाहिए। सृजनात्मक सोच जीवन का निर्माण करती है।
जैनाचार्य विजयराज महाराज ने प्रवचन में देते हुए कहा कि सोच, समझ, श्रद्धा और पुरूषार्थ ये चार चीजें ही जीवन का निर्माण करती है। इसके बिना मानव जीवन अधूरा है। महाराजश्री के चातुर्मासिक प्रवचन से पहले शुक्रवार को साधु-संतों, मुनियों, साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं के साथ जयकारों करते हुए चातुर्मासिक प्रवेश विहार यात्रा आचार्य कृपलानी मार्ग, गोविंद मार्ग, विद्यालय मार्ग, सूर्य मार्ग होते हुए तिलक नगर अष्टा स्पोर्ट्स एकेडमी के सामने नवकार भवन पर जाकर सम्पन्न हुई। जैनाचार्य प्रवर विजयराज महाराज के प्रवचनों की शुरुआत प्रार्थना ‘शुभ मंगल, शुभ मंगल हो…‘तेरा-मेरा, नभ,धरती का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण, सबका शुभ मंगल हो…’ से हुई। इससे पहले ससंघ मुनियों और साध्वी महासती श्री नेहाश्री जी म.सा. आचार्य श्री को अष्ट मंगलमय जीवन पर प्रकाश डाला उन्होंने जैनाचार्य के सहज-सरल व्यवहार और उनके गुणों के बारे में श्रावक-श्राविकाओं को बताया। इस अवसर पर महाराजश्री ने प्रार्थना ‘केवली पण्णतं धम्म सरणं पवज्जामि’ सभी श्रद्धालुओं से बार-बार दोहराने का आग्रह किया। दोपहर में आचार्य श्री का नवकार भवन में महामांगलिक हुआ। उसमें आचार्यश्री ने लोगस्स के पाठ तथा उवस्ग्गहरं स्तोत्र को लयबद्ध पाठ करके मांगलिक फरमाया। सुबह के समय चातुर्मासिक प्रवचन के अवसर पर विधानसभाध्यक्ष वसुदेव देवनानी, सिविल लाईंस क्षेत्र से विधायक गोपाल शर्मा और जिला कलेक्टर डॉ.जितेंद्र सोनी सहित काफी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित हुए।



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