पिछले दिनों से शुरू हुए ईरान-इजराइल युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव भारत में महंगाई पर पडऩे की संभावना है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक पेट्रोलियम आयात करता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें महंगाई से सीधे जुड़ी हुई हैं, क्योंकि माल ढुलाई के लिए भारत अभी भी सडक़ परिवहन पर निर्भर है। ऐसे में अगर ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते पेट्रोलियम की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में आवश्यक वस्तुओं जैसे सब्जियों और दूध की कीमतों में वृद्धि होना तय है। वहीं शेयर बाजार में निकट भविष्य में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है। बाजार इस समय ओवरबॉट की स्थिति में है। इसके अलावा एसईबीआई की ओर से एफ एंड ओ नियमों में बदलाव और चीन के नए आर्थिक ऐलानों का असर भी बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिलेगा। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष में पिछले दिनों ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों से हमला किया, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस संघर्ष का प्रभाव केवल इजराइल, ईरान और लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे पश्चिमी एशिया में असर डाल सकता है। इससे भारत भी प्रभावित हो सकता है। ईरान के इजराइल पर हमले का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत का उछाल आया है, जिसमें ब्रेंट फ्यूचर का रेट 3.5 प्रतिशत बढक़र 74.2 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जबकि अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल 2.54 डॉलर यानी 3.7 प्रतिशत बढक़र 70.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ईरान-इजराइल युद्ध के चलते नई परिस्थितियों को देखते हुए यह देखना होगा कि अगले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कटौती का निर्णय लिया जाएगा या नहीं। आरबीआई के सामने कई चुनौतियां हैं, जैसे अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, चीन द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को 142 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज का प्रावधान और ईरान-इजराइल युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि। इन सभी समस्याओं के बीच आरबीआई को महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे। इसके साथ ही, आने वाले त्योहारों के मौसम में डिमांड को बढ़ाने के लिए भी आरबीआई को संतुलन बनाना होगा।

