Monday, July 6, 2026 |
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ईरान युद्ध से उद्योग दबाव में, सीआईआई चिंतित

सीआईआई की सरकार से उद्योगों के लिए अतिरिक्त राजकोषीय और मौद्रिक रियायतों की मांग

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। देश के शीर्ष औद्योगिक निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को ईरान युद्ध संकट के चलते पैदा हुई अनिश्चितता से निपटने के लिए उद्योगों के लिए अधिक राजकोषीय और मौद्रिक रियायतों की मांग की। साथ ही, सरकार द्वारा इस समस्या से निपटने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की सराहना की।

उद्योगों के लिए राहत पैकेज की जरूरत
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार और आरबीआई ने तेज प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय के साथ काम किया है, जिससे बाजार की भावना को संभालने में मदद मिली। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में व्यवधान के चलते उद्योगों की लागत बढ़ रही है, ऐसे में अगले चरण में लक्षित तरलता सहायता, सस्ती ऋण सुविधा, व्यापार लागत प्रबंधन और विदेशी मुद्रा स्थिरता जैसे कदम जरूरी होंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय पर हस्तक्षेप से ही उद्योगों में भरोसा बना रहेगा और निवेश गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।

एमएसएमई और निर्यातकों पर सबसे ज्यादा असर
संगठन के अनुसार, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और व्यापार चैनलों में आपूर्ति पक्ष का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे एमएसएमई और निर्यात-उन्मुख इकाइयों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। कई उद्योगों ने संकेत दिया है कि शुरुआती नीतिगत कदमों ने तत्काल प्रभाव को कम किया, लेकिन लंबी अवधि में परिचालन और नकदी प्रवाह से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। सीआईआई ने सुझाव दिया है कि महामारी के दौरान लागू ईसीएलजीएस की तर्ज पर नई आपातकालीन ऋण गारंटी योजना शुरू की जाए। इसके साथ ही सीमित अवधि के लिए ऋण पुनर्गठन और भुगतान में मोहलत जैसे कदम भी जरूरी बताए गए हैं।

अतिरिक्त राहत उपायों के सुझाव
सीआईआई ने सुझाव दिया है कि बैंकों को सीमित अवधि के लिए योग्य मामलों में कार्यशील पूंजी सीमा का पुनर्मूल्यांकन और वृद्धि करने की अनुमति दी जा सकती है, विशेष रूप से निर्यात-उन्मुख और गैस-निर्भर इकाइयों के लिए जो अस्थायी संकट का सामना कर रही हैं। व्यवधान की अवधि के दौरान रियायती ऋण शर्तों के साथ नकद ऋण सीमा में 20 प्रतिशत तक की चरणबद्ध वृद्धि से परिचालन में महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। सीआईआई ने मांग की है कि एमएसएमई और प्रभावित क्षेत्रों के लिए ऋण प्रसंस्करण शुल्क, विदेशी मुद्रा प्रबंधन शुल्क और दस्तावेजीकरण लागत सहित प्रशासनिक बैंकिंग शुल्कों में अस्थायी कमी या छूट पर विचार किया जाए।

सीआईआई की अन्य मांगों में प्रभावित औद्योगिक समूहों में व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (टी-रिडएस) प्लेटफॉर्म का अधिक सक्रिय रूप से विस्तार, व्यवधान के कारण होने वाले लागत प्रभावों को कम करने के लिए ऊर्जा इनपुट पर कर और शुल्क संरचना का समयबद्ध युक्तिकरण और पूंजीगत वस्तुओं पर त्वरित मूल्यह्रास लाभ शामिल हैं।



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