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औद्योगिक उत्पादन 6.7 प्रतिशत बढ़ा

by Business Remedies
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विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत वृद्धि

मोटर वाहन उत्पादन में 22.2 प्रतिशत की आई तेजी

पूंजीगत वस्तुओं में 16.1 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

खनन क्षेत्र में 0.9 प्रतिशत की आई गिरावट

नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क

भारत की औद्योगिक गतिविधियों ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में सालाना आधार पर 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण क्षेत्र का रहा।

विनिर्माण क्षेत्र ने औद्योगिक वृद्धि को दी रफ्तार

देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र ने जुलाई में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। यह क्षेत्र रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार माना जाता है। विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 19 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहन निर्माण, विद्युत उपकरण निर्माण और मशीनरी एवं उपकरण निर्माण का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। मोटर वाहन निर्माण में 22.2 प्रतिशत, विद्युत उपकरणों में 28.3 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरण निर्माण में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

ऊर्जा क्षेत्र का भी मजबूत प्रदर्शन

जुलाई में बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके विपरीत खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसमें 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जुलाई में खनन औद्योगिक क्षेत्र का एकमात्र प्रमुख कमजोर क्षेत्र रहा।

पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में आई 16.1 प्रतिशत की तेजी

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, जुलाई में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ा। पूंजीगत वस्तुओं में कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और उपकरण शामिल होते हैं। इस श्रेणी में मजबूत वृद्धि को अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश का संकेत माना जाता है। इससे आने वाले समय में रोजगार और आय सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उपभोक्ता मांग में भी मजबूती

उपभोक्ता मांग में भी सुधार देखने को मिला। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन के उत्पादन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसे बढ़ती आय और बेहतर उपभोक्ता विश्वास का समर्थन मिला। हालांकि, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं जैसे साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के उत्पादन में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं बुनियादी ढांचा और निर्माण सामग्री क्षेत्र में उत्पादन 6.9 प्रतिशत बढ़ा। सरकारी निवेश से राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं को मिल रहे समर्थन का लाभ इस क्षेत्र को मिला है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की गणना पद्धति में बदलाव

सांख्यिकी मंत्रालय ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की गणना पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मंत्रालय ने कुछ वस्तु समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक के स्थान पर उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक को अपस्फीतिकारक के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है। यह बदलाव औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की 463 वस्तु समूहों वाली टोकरी में से 234 समूहों पर लागू होगा, जो कुल सूचकांक भार का 36.02 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं। मंत्रालय ने नए मानक के आधार पर 2022-23 आधार वर्ष वाली अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक श्रृंखला को संशोधित कर पुन: जारी किया है।

 

यह श्रृंखला पहले 1 जून 2026 को जारी की गई थोक मूल्य सूचकांक आधारित श्रृंखला की जगह लेगी।



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