समाधान के लिए निर्यातकों ने की सरकार से हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली | BR News Network । भारत से मूंगफली (groundnut) निर्यात को लेकर एक बड़ा झटका सामने आया है। एशिया के प्रमुख आयातक देशों में शामिल Indonesia ने हाल ही में आयात नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों और किसानों पर सीधा असर पड़ रहा है। नए नियमों के चलते अगले कुछ महीनों तक सप्लाई बाधित रहने और कीमतों में तेज उछाल की संभावना जताई जा रही है।
Indonesia के नए आयात नियमों ने भारत की मूंगफली सप्लाई चेन पर ब्रेक लगा दिया है। सख्त गुणवत्ता मानक, GAP certificate और कोटा सिस्टम के चलते निर्यात में गिरावट और कीमतों में तेज उछाल दोनों की स्थिति बन रही है। यह बदलाव जहां एक ओर अल्पकालिक संकट पैदा करेगा, वहीं लंबी अवधि में भारतीय निर्यातकों को गुणवत्ता सुधार और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनने के लिए मजबूर करेगा।
क्या हैं Indonesia के नए नियम?
Indonesia सरकार ने मूंगफली आयात के लिए कई कड़े प्रावधान लागू किए हैं:-
- GAP (Good Agricultural Practices) certificate अनिवार्य
- अब किसानों और निर्यातकों को global traceability प्रमाणन लेना होगा।
- पहले से लागू गुणवत्ता नियमों को और सख्त किया गया है, खासकर फफूंद से जुड़े toxin (aflatoxin) के स्तर पर।
नया आयात कोटा सिस्टम
Indonesia ने आयात को नियंत्रित करने के लिए कोटा आधारित व्यवस्था लागू की है, जिससे सीमित मात्रा में ही आयात संभव होगा। व्यापारियों को नियम लागू होने से पहले बहुत कम समय दिया गया, जबकि आमतौर पर 90 दिन का समय मिलता है, इस बार समय बेहद सीमित रहा।
व्यापार पर तात्कालिक असर
कई निर्यातक नए नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे shipment रुके हुए हैं। Indonesia ने मान्यता प्राप्त निर्यातकों की संख्या घटाकर लगभग 75 कर दी है और नियमों की जटिलता के कारण कई companies ने फिलहाल निर्यात से दूरी बना ली है।
भारत-Indonesia मूंगफली व्यापार
Indonesia भारत के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक रहा है। कुल मूंगफली निर्यात का करीब 30-35 प्रतिशत हिस्सा Indonesia जाता रहा है। 2025 में गुणवत्ता विवाद के बाद सितंबर में आयात पर अस्थायी रोक भी लगाई गई थी। हाल में प्रतिबंध हटने के बावजूद सख्त नियमों के कारण निर्यात सामान्य नहीं हो पाया है।
कीमतों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार सप्लाई में कमी से मूंगफली की कीमतों में 60-80 प्रतिशत तक उछाल संभव है। वैश्विक बाजार में उपलब्ध compliant (नियमों के अनुरूप) stock सीमित होगा। Indonesia में भी घरेलू कीमतें बढऩे के संकेत हैं। reports के अनुसार, यह बदलाव short-term supply shock पैदा कर सकता है, जिससे कीमतें मजबूत रहेंगी।
किसानों और निर्यातकों के लिए चुनौती
GAP certificate प्राप्त करना समय और लागत दोनों में भारी पड़ सकता है। खेत स्तर पर traceability और गुणवत्ता नियंत्रण भी जरूरी होगा। साथ ही छोटे किसानों के लिए अनुपालन काफी मुश्किल होगा।
व्यापार दबाव में रहने की संभावना
जो निर्यातक जल्दी GAP और गुणवत्ता मानकों को पूरा कर लेंगे, उन्हें फायदा हो सकता है। बाजार में प्रतिस्पर्धा घटने से margin बढऩे की संभावना रहेगी, लेकिन अल्पावधि (3-6 महीने) में व्यापार दबाव में रहेगा।
Indonesia भारत के मूंगफली निर्यात का एक प्रमुख बाजार रहा है, जहां कुल निर्यात का लगभग 30-35 प्रतिशत हिस्सा जाता रहा है। Indonesia के नए नियमों के चलते मूंगफली का निर्यात प्रभावित हुआ है। इस विषय में भारत सरकार को Indonesia सरकार से उच्च स्तर पर वार्ता कर भारतीय निर्यातकों को राहत दिलानी चाहिए। निर्यातकों व किसानों को GAP certification के लिए वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण दिलाना चाहिए।
- Jugal Rathi, अध्यक्ष, Bikaner Vyapar Udyog Mandal
भारत का मूंगफली उद्योग वर्तमान में एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। Indonesia के नए नियमों से भारतीय मूंगफली निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। Indonesia भारत के मूंगफली निर्यात का एक प्रमुख बाजार रहा है। नए नियमों के कारण न केवल निर्यात बाधित हुआ है, बल्कि shipment रुकने, लागत बढऩे व कीमतों में अस्थिरता की स्थिति भी पैदा हो रही है।
- Sanjay Jain Sand, सचिव, Bikaner Vyapar Udyog Mandal

