बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी 2014 में सिर्फ 10 अरब डॉलर से बढक़र 2024 में 165.7 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। अब देश का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर तक पहुँचाया जाए।
बुधवार को डॉ. सिंह ने युवाओं के लिए बायोइकोनॉमी, एनवायरनमेंट और एम्प्लॉयमेंट (BioEx) चैलेंज और देश का पहला नेशनल बायोफाउंड्री नेटवर्क लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार को आगे बढ़ाने में बायोटेक्नोलॉजी को एक अहम चालक बनाएगी। उन्होंने बताया कि बीते एक साल में BioEx नीति के तहत देश के बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर ने तेज़ी से प्रगति की है। कई नए संस्थान खोले गए हैं, शोध सहयोग शुरू हुए हैं और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ हुई है।
मुख्य उपलब्धियों में मोहाली में देश के पहले बायोमैन्युफैक्चरिंग संस्थान की स्थापना, बायो-एआई हब, बायोफाउंड्री, और दर्जनों संयुक्त शोध परियोजनाएँ शामिल हैं। ये परियोजनाएँ सेल और जीन थेरेपी, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, कार्बन कैप्चर और फंक्शनल फूड्स जैसे उन्नत क्षेत्रों को कवर करती हैं।
डॉ. सिंह ने बताया कि हाल ही में डीबीटी और इसरो के बीच अंतरिक्ष बायोटेक्नोलॉजी और बायोमैन्युफैक्चरिंग में सहयोग के लिए समझौता हुआ है। इसके तहत प्राथमिक परियोजनाओं की पहचान के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाया गया है। इस साल डीबीटी समर्थित तीन प्रयोग अंतरिक्ष यात्री गु्रप कैप्टन शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किए गए।
राज्यों के स्तर पर भी पहल हुई है। असम सरकार के साथ समझौता कर BioEx सेल स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भारत के 52 देशों में मिशनों ने BioEx नीति पर सुझाव दिए हैं, जिन पर विदेश मंत्रालय और डीबीटी मिलकर आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।

