Saturday, July 11, 2026 |
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भारतीय अर्थव्यवस्था तेज विकास की राह पर बरकरार : सीईए नागेश्वरन

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/मुंबई(आईएएनएस)। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि उच्च आवृत्ति के आर्थिक संकेतकों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि व्यापार से जुड़ी चुनौतियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें अन्य बड़े मुद्दों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। एक कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि पिछले वर्ष खपत में आई सुस्ती का मुख्य कारण कर्ज और तरलता की कड़ी स्थिति थी। इसी कारण सरकार ने बजट में मध्यम वर्ग के लिए बड़े कर कटौती की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी नीतिगत दरों में 100 आधार अंकों की कटौती की और तरलता अधिशेष सुनिश्चित किया, जिससे विकास को सहारा मिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ का भारत की जीडीपी वृद्धि पर क्या असर होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। नागेश्वरन ने कहा कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में अमेरिका और चीन से प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रयासों को तेजी से बढ़ाना होगा। उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, एआई का आर्थिक प्रभाव और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को मुख्य चुनौतियां बताया। उन्होंने निजी क्षेत्र से अपील की कि वे तिमाही नतीजों से आगे सोचें और दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान दें। अमेरिका एनवीडिया, इंटेल और एएमडी जैसी कंपनियों के जरिये एआई और चिप डिजाइन में अग्रणी है, जबकि चीन ने सरकारी समर्थन से चिप निर्माण को बढ़ावा दिया है। भारत सरकार ने पहली बार घरेलू निर्माण को मजबूत करने के लिए ‘सेमिकॉन इंडिया’ जैसी योजनाएं शुरू की हैं। मंगलवार को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में चार सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए 4,600 करोड़ रुपये की मंजूरी दी।

नागेश्वरन ने उपभोक्ता खर्च के रुझानों में बदलाव पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग और ऑप्शन ट्रेडिंग पर लोगों का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। केवल जुलाई में ही ऑनलाइन गेमिंग पर करीब 10,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो सालाना करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में “लाभ घर (कंपनी) का होता है, सट्टेबाज का नहीं”।
उन्होंने यह भी बताया कि शहरी खपत का बड़ा हिस्सा अब सूचीबद्ध कंपनियों से असूचीबद्ध कंपनियों की ओर जा रहा है, जिससे सेवा क्षेत्र की खपत का पर्याप्त डेटा नहीं मिल पा रहा।



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