Friday, July 3, 2026 |
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भारतीय कंपनियां वैश्विक विस्तार की ओर, जोखिम लेने की क्षमता में बढ़ोतरी

by Business Remedies
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Diagram showing global expansion and investment strategies of Indian companies

New Delhi,

भारत की लगभग सभी कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सोच-समझकर जोखिम लेने को तैयार हैं। एचएसबीसी द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार, 98 प्रतिशत भारतीय कंपनियां अगले पांच वर्षों में सीमा-पार व्यापार और निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं। यह आंकड़ा सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे अधिक है, जबकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है।

जोखिम लेने की क्षमता में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, 94 प्रतिशत भारतीय कंपनियों ने कहा कि वे पांच साल पहले की तुलना में अब अधिक जोखिम लेने को तैयार हैं। यह वैश्विक औसत 87 प्रतिशत से अधिक है, जो भारत की बढ़ती कारोबारी आत्मविश्वास को दर्शाता है। भारत में 86 प्रतिशत वरिष्ठ अधिकारी और संस्थागत निवेशक अपनी रणनीतियों को दीर्घकाल के लिए पुनर्गठित कर रहे हैं। वहीं, 95 प्रतिशत का मानना है कि आर्थिक उतार-चढ़ाव अब वैश्विक व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बन चुका है। करीब 91 प्रतिशत कंपनियों ने बढ़ती अनिश्चितता के कारण अपनी पूंजी आवंटन रणनीति में बदलाव किया है। वहीं, 94 प्रतिशत कंपनियां उच्च विकास वाले बाजारों में अपने निवेश को सक्रिय रूप से बढ़ा रही हैं।

विदेशों में निवेश बढ़ाने की योजना

लगभग 86 प्रतिशत भारतीय कंपनियां अगले तीन वर्षों में विदेशों में अपने पूंजी निवेश को बढ़ाने की उम्मीद कर रही हैं। यह वैश्विक औसत 73 प्रतिशत से काफी अधिक है, जिससे भारत की आक्रामक वैश्विक रणनीति स्पष्ट होती है। करीब 93 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि भविष्य में सीमा-पार पूंजी प्रवाह अधिक क्षेत्रीय स्वरूप ले सकता है, जिससे व्यापार के नए क्षेत्रीय केंद्र उभर सकते हैं। एचएसबीसी इंडिया के बैंकिंग प्रमुख अजय शर्मा ने कहा कि यह निष्कर्ष दर्शाते हैं कि विकास कहां और कैसे होगा, इसमें बड़ा बदलाव आ रहा है। मजबूत घरेलू विकास, अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा और नए व्यापारिक संबंधों के कारण भारत वैश्विक व्यापार और निवेश में एक प्रमुख शक्ति बनता जा रहा है।

प्रमुख वैश्विक बाजारों की पसंद

भारतीय कंपनियों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (58 प्रतिशत) और सऊदी अरब (45 प्रतिशत) प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभरे हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम को 56 प्रतिशत और उत्तरी अमेरिका को 43 प्रतिशत कंपनियों ने प्राथमिकता दी है। भारत में 71 प्रतिशत कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा अवसंरचना को निवेश निर्णय का प्रमुख आधार बताया, जो वैश्विक औसत से 20 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, 98 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले दशक में डिजिटल परिसंपत्तियां पूंजी बाजार को पूरी तरह बदल देंगी। वहीं, 49 प्रतिशत का अनुमान है कि वर्ष 2035 तक वैश्विक बाजार मुख्य रूप से डिजिटल अवसंरचना पर आधारित होंगे।



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