नई दिल्ली,
केंद्र सरकार ने देश के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत चल रहे इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत 10 भारतीय एआई स्टार्टअप्स का चयन अंतरराष्ट्रीय विस्तार कार्यक्रम के लिए किया गया है। यह पहल भारत की कंपनियों को विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति बनाने में मदद करेगी। सरकार का उद्देश्य है कि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक नवाचार तंत्र से जोड़ा जाए और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। यह ग्लोबल एक्सेलेरेशन कार्यक्रम फ्रांस के प्रतिष्ठित संस्थानों स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत चयनित स्टार्टअप्स को संसाधन, मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसर प्रदान किए जाएंगे। हर समूह में 10 स्टार्टअप्स को शामिल किया जाता है, जिन्हें वैश्विक विस्तार के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाता है। इस बार चयनित स्टार्टअप्स में एआई हेल्थ हाईवे, अविरोस, कॉगनेक्टो, फ्लॉन्ट, ग्रीनफाई, क्लाइमेटफोर्स टेक्नोलॉजीज, इन्फीहील हेल्थटेक, इनलस्ट्रो लर्निंग, प्रेडको, स्काईसर्व और टेस्टएआईएनजी सॉल्यूशंस शामिल हैं।
चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण की संरचना
इन स्टार्टअप्स का चयन कई चरणों वाली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत तीन सप्ताह के ऑनलाइन तैयारी चरण से होगी, जिसके बाद चयनित कंपनियां तीन महीने के लिए पेरिस में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इस दौरान उन्हें उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलेगा और फ्रांस व यूरोप के प्रमुख तकनीकी संगठनों के साथ जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार की समझ और व्यावसायिक विस्तार में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय रणनीति के अनुरूप पहल
यह कार्यक्रम भारत की राष्ट्रीय एआई रणनीति के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें सीमा पार सहयोग, वैश्विक नवाचार तंत्र से जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने पहले जानकारी दी थी कि इंडिया एआई मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू को शामिल किया जा चुका है और 190 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। साथ ही, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत 10 सेमीकंडक्टर इकाइयों को स्वीकृति दी गई है, जिससे देश में चिप निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 38,231 जीपीयू को एक साझा कंप्यूट सुविधा के तहत जोड़ा गया है और स्टार्टअप्स व शैक्षणिक संस्थानों को लगभग 65 रुपये प्रति जीपीयू प्रति घंटे की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

