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भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र तेज़ी से बढ़ेगा, FY30 तक 362 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

by Business Remedies
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India's logistics network and freight movements

New Delhi,

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र आने वाले वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र FY25 के 246 अरब डॉलर से बढ़कर FY30 तक 362 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस दौरान यह क्षेत्र लगभग 8 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगा। बढ़ती खपत, व्यापार का विस्तार, लागत में कमी और सरकार की प्रमुख योजनाओं से मिलने वाली दक्षता इस वृद्धि के मुख्य कारण बताए गए हैं।

माल ढुलाई मात्रा में बड़ा इजाफा संभावित

रिपोर्ट में कहा गया है कि माल ढुलाई की मात्रा FY24 के लगभग 5,000 मिलियन टन से बढ़कर FY30 तक 7,100 मिलियन टन से अधिक हो सकती है। यह वृद्धि करीब 6.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से होने का अनुमान है। इस बढ़ोतरी में विनिर्माण, निर्माण, ई-कॉमर्स और खुदरा क्षेत्र की बड़ी भूमिका रहेगी। विशेष रूप से तेज डिलीवरी लॉजिस्टिक्स खंड में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो पूरे उद्योग के लिए एक प्रमुख प्रेरक कारक साबित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खंड भविष्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की दिशा तय करेगा। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में उपयोग के आधार पर देखें तो विनिर्माण खंड FY25 में लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। मजबूत औद्योगिक उत्पादन, ऑटोमोबाइल और औषधि क्षेत्र में प्रगति तथा निर्यात मांग में वृद्धि इसके पीछे मुख्य कारण रहे। वेयरहाउसिंग और आपूर्ति श्रृंखला सेवाएं सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र बनकर उभर रही हैं। इसमें बढ़ते निवेश और जीएसटी के कारण संगठित बाजार के विस्तार से मजबूती मिल रही है।

पश्चिम भारत अग्रणी, उत्तर और दक्षिण भी मजबूत

क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिम भारत लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, जिसका प्रमुख कारण मुंबई की वित्तीय मजबूती, बड़े बंदरगाह, गुजरात का औद्योगिक आधार और औद्योगिक गलियारे हैं।
उत्तर भारत करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है, जहां मजबूत आधारभूत संरचना और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों का लाभ मिल रहा है।
दक्षिण भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है, जहां बंदरगाह सुविधाएं, आईटी शहर और विनिर्माण गतिविधियां इसे मजबूती देती हैं।
पूर्व भारत का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है, लेकिन यहां तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जिसका कारण बेहतर संपर्क, बंदरगाह आधारित व्यापार और पूर्वोत्तर व पड़ोसी देशों से जुड़ाव है।

लॉजिस्टिक्स लागत में भारत की स्थिति बेहतर

भारत में लॉजिस्टिक्स लागत देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 8 प्रतिशत है, जो दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोप के बराबर है और चीन के मुकाबले काफी कम है, जहां यह लागत 2023 में लगभग 14 प्रतिशत रही। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति जैसी सरकारी पहल का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को और कम करना है। वर्तमान में भारत में सड़क परिवहन का दबदबा है, जो कुल बाजार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जबकि रेल परिवहन करीब 31 प्रतिशत माल ढुलाई करता है।



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