Sunday, August 9, 2026 |
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भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव से टेक्नोलॉजी खर्च में होगी तेज़ बढ़ोतरी: रिपोर्ट

by Business Remedies
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India Enterprises Increasing Technology Spending Driven By Artificial Intelligence And Data Modernisation

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा परिवर्तन की बढ़ती मांग के चलते टेक्नोलॉजी पर खर्च तेज़ी से बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की कंपनियों का आईटी खर्च लगभग8प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो वैश्विक स्तर पर अनुमानित 4 से 6 प्रतिशत वृद्धि से अधिक रहेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले वर्षों में भारत तकनीकी निवेश वृद्धि के मामले में दुनिया के कई बड़े देशों से आगे निकल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 से 18 महीनों में टेक्नोलॉजी पर खर्च में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है और अगले 2 से 3 वर्षों तक यह रुझान जारी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में कंपनियां अब लंबे समय के तकनीकी विकास और डिजिटल ढांचे को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। 250 सेअधिक टेक्नोलॉजी और व्यापार क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की राय पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियां अपने बजट का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और डाटा आधुनिकीकरण पर खर्च कर रही हैं। भारत में कुल तकनीकी बजट का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत निवेश में लगाया जा रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा केवल 20 से 30 प्रतिशत के बीच है।

भारतीय कंपनियों के पूंजीगत खर्च का लगभग30प्रतिशत हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और डाटा आधुनिकीकरण पर खर्च हो रहा है। इसके अलावा मुख्य एप्लिकेशन आधुनिकीकरण पर 25 प्रतिशत, क्लाउड और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर25प्रतिशत तथा साइबर सुरक्षा पर 20 प्रतिशत खर्च किया जा रहा है। इससे साफ है कि कंपनियां अपने तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। बेइन एंड कंपनी के टेक्नोलॉजी प्रैक्टिस एशिया पैसिफिक प्रमुख संदीप नायक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति के कारण कंपनियों को अपने कार्य मॉडल और प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को ऐसे तकनीकी ढांचे तैयार करने होंगे जो बदलाव की गति को तेज़ कर सकें और व्यापार को अधिक सक्षम बना सकें।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारी निवेश के बावजूद कई कंपनियां तकनीकी बदलावों का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं। इसका मुख्य कारण व्यापार और आईटी विभागों के बीच तालमेल की कमी, डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ढांचे की कमजोर स्थिति तथा पुराने कार्य मॉडल बताए गए हैं। वर्ष 2026 के कुल तकनीकी बजट का लगभग40प्रतिशत हिस्सा परिवर्तन से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च होने की संभावना है। इनमें से लगभग आधा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा आधारित बदलावों पर केंद्रित रहेगा।

अगले12 महीनों में लगभग 60 प्रतिशत मुख्य सूचना अधिकारी उच्च प्रभाव वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडमैप, एप्लिकेशन सुधार और डाटा आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देंगे। वहीं 72 प्रतिशत अधिकारियों ने पुरानी तकनीकी व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती बताया। इसके अलावा 57 प्रतिशत अधिकारियों ने नई तकनीकी विशेषज्ञता की कमी और 49 प्रतिशत ने नई तकनीकों से मिलने वाले लाभ को लेकर अनिश्चितता को बड़ी समस्या माना। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत व्यापारिक नेताओं का मानना है कि वर्तमान डाटा ढांचा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तैयारी बड़े स्तर पर कारोबार को संभालने के लिए अभी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में भारतीय कंपनियों को तकनीकी बुनियादी ढांचे और कुशल कर्मचारियों पर अधिक निवेश करना पड़ सकता है।



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