नई दिल्ली,
क्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत के साथ मिलकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।
ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ता दबाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले दिए गए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ली ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रभाव पड़ा है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति भी बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर हैं, जिसमें कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया भारत के साथ मिलकर बहुपक्षीय स्तर पर ऐसे प्रयास करेगा, जिससे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग जारी रखेंगे।
आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की पहल
ऊर्जा और कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रपति ली ने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीक और भारत के खनन व शोधन क्षेत्र को मिलाकर स्थिर आपूर्ति प्रणाली विकसित की जा सकती है। राष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, नौवहन और जहाज निर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि पारंपरिक क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल के अलावा अब दोनों देश वित्त और रक्षा उद्योग सहित अन्य क्षेत्रों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे। यह बैठक दोनों नेताओं के बीच तीसरी प्रत्यक्ष मुलाकात होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

