Mumbai,
वैश्विक कच्चे तेल के दामों में सोमवार को तेज उछाल देखा गया और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्धविराम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच बाजार में यह तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट कच्चा तेल वायदा में करीब 7.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.87 डॉलर प्रति बैरल का उच्च स्तर देखा गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 8.76 प्रतिशत बढ़कर 91.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चा तेल 6.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 8,289 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्ती से बढ़ी चिंता
तेल की कीमतों में यह उछाल ईरान के उस बयान के बाद आया, जिसमें उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने की बात कही। ईरान ने चेतावनी दी कि यह महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग फिर से बंद कर दिया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान इस जलमार्ग को बंद कर अमेरिका को धमका नहीं सकता। ईरान ने अपने कदम को अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में बताया और कहा कि उसके बंदरगाहों पर जारी रोक युद्धविराम का उल्लंघन है। देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी कहा कि उनकी नौसेना दुश्मनों को कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है। अमेरिका ने दावा किया कि उसने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त किया, जो उसके प्रतिबंधों को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इससे यह भी संदेह पैदा हो गया है कि दोनों देशों के बीच घोषित युद्धविराम तय समय तक टिक पाएगा या नहीं।
stock market update: Sensex और Nifty में गिरावट
इस बीच घरेलू शेयर बाजार में अस्थिरता देखने को मिली। Sensex और Nifty दोनों नकारात्मक स्तर पर कारोबार करते दिखे और शुरुआती बढ़त बाद में खत्म हो गई। एशियाई बाजारों में हालांकि सकारात्मक रुख रहा। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत तक बढ़े। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती देखी गई थी। प्रमुख सूचकांक सकारात्मक स्तर पर बंद हुए, जिससे वैश्विक निवेशकों का मनोबल कुछ हद तक मजबूत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति और बिगड़ती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार जा सकती हैं। इससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

