Wednesday, March 11, 2026 |
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एशिया-प्रशांत में रियल एस्टेट निवेश का बड़ा केंद्र बन रहा भारत

वर्ष 2025 में तेज़ वृद्धि दर्ज

by Business Remedies
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Growing real estate investment in India and the state of the Asia Pacific market

नई दिल्ली,

भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रियल एस्टेट निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025 के दौरान क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में निवेश वृद्धि के मामले में भारत सबसे तेज़ बढ़ने वाले देशों में शामिल रहा है। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई। रियल एस्टेट परामर्श कंपनी कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नौ प्रमुख बाजारों में वर्ष 2025 के दौरान कुल रियल एस्टेट निवेश लगभग 162 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष की दूसरी छमाही में निवेश गतिविधियों में तेजी देखी गई, क्योंकि खरीदार और विक्रेता कीमतों को लेकर आपसी सहमति के करीब पहुंचे।

सिंगापुर और भारत में सबसे तेज़ वृद्धि

रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 में सिंगापुर और भारत ने सालाना आधार पर सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की। सिंगापुर में निवेश 35 प्रतिशत बढ़ा, जबकि भारत में यह वृद्धि लगभग 29 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि बाजार की मजबूत बुनियाद और निवेश के बढ़ते अवसरों को दर्शाती है। कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक बदल याज्ञिक ने बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश बाजारों में घरेलू पूंजी निवेश गतिविधियों को आगे बढ़ा रही है। हालांकि भारत में सीमा-पार निवेश का स्तर अपेक्षाकृत अधिक मजबूत रहा है। वर्ष के दौरान लगभग 8.5 अरब डॉलर के निवेश प्रवाह में से करीब 43 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों की रही।

कार्यालय परिसंपत्तियों में सबसे अधिक निवेश

क्षेत्रवार विश्लेषण में पाया गया कि कार्यालय परिसंपत्तियां एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेश का प्रमुख केंद्र बनी रहीं। उच्च गुणवत्ता वाले और अच्छी लोकेशन वाले कार्यालय परिसरों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में नई आपूर्ति सीमित है। इस कारण निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार खुदरा परिसंपत्तियों में निवेश भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025 में खुदरा निवेश में लगभग 15 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। बेहतर परिसंपत्ति प्रदर्शन और उपभोक्ता विश्वास में सुधार से निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हुआ है। इसके अलावा वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्ग इस अवधि में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। इस वृद्धि के पीछे संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग को प्रमुख कारण माना गया है।

भारत में 2026 तक मजबूत रहने की उम्मीद

आने वाले समय को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 तक भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश मजबूत बना रहेगा। इसका मुख्य कारण देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं और उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियों की लगातार बढ़ती मांग है। हालांकि बदल याज्ञिक ने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से जुड़ी बातचीत का असर आगे भी निवेश माहौल पर नजर रखने वाला महत्वपूर्ण कारक रहेगा। कोलियर्स इंडिया के अनुसंधान निदेशक विमल नादर के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश बाजारों की तरह भारत में भी संस्थागत निवेशकों की पहली पसंद कार्यालय परिसंपत्तियां बनी हुई हैं। वर्ष 2025 में नौ प्रमुख बाजारों में से पांच में रियल एस्टेट निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में रहा। भारत में अकेले वर्ष 2025 के दौरान कार्यालय परिसंपत्तियों में लगभग 4.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल संस्थागत निवेश प्रवाह का आधे से अधिक हिस्सा है।



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