बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने निर्यात किए गए कार्गो को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Strait of Hormuz में उत्पन्न परिस्थितियों के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कई भारतीय जहाज अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई जहाजों को वापस भारतीय बंदरगाहों की ओर लौटना पड़ा है। ऐसे में निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों को राहत देने के लिए Central Board of Indirect Taxes and Customs (सीबीआईसी) ने एक परिपत्र जारी कर सरलीकृत प्रक्रिया की घोषणा की है।
नई व्यवस्था के तहत भारत लौट रहे कंटेनरों को बंदरगाह टर्मिनलों पर सामान्य आयात दस्तावेज जैसे बिल ऑफ एंट्री जमा किए बिना ही उतारा जा सकेगा। हालांकि, सीमा शुल्क अधिकारी कंटेनरों को जहाज से उतारने की अनुमति देने से पहले शिपिंग दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। अधिकारी कंटेनर के विवरण का मिलान संबंधित शिपिंग बिल से करेंगे और यह भी जांचेंगे कि कंटेनर की सील सुरक्षित है या नहीं। यदि सील टूटी हुई या उसके साथ छेड़छाड़ पाई जाती है, तो कंटेनर की विस्तृत जांच की जाएगी।
सीबीआईसी ने निर्यातकों को ऐसे शिपमेंट के शिपिंग बिल रद्द करने की अनुमति भी दी है, भले ही Export General Manifest (EGM) पहले ही दाखिल किया जा चुका हो। इस सुविधा के लिए जल्द ही Indian Customs Electronic System (ICES) प्लेटफॉर्म पर एक नया विकल्प जोड़ा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात प्रोत्साहन उन कार्गो के लिए गलती से जारी न हों, जो वास्तव में विदेशी गंतव्यों तक पहुंचे ही नहीं। शिपिंग बिल रद्द होने के बाद इसकी जानकारी ICEGATE के माध्यम से Reserve Bank of India और Directorate General of Foreign Trade जैसी एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी।
हालांकि, यदि निर्यातकों को पहले से ही किसी प्रकार का कर लाभ या निर्यात प्रोत्साहन—जैसे IGST Refund या Duty Drawback—प्राप्त हो चुका है, तो उन्हें यह राशि सरकार को वापस करनी होगी। सरकार की यह अस्थायी छूट परिपत्र जारी होने की तारीख से 15 दिनों तक प्रभावी रहेगी और इससे प्रभावित निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है।



