Monday, July 27, 2026 |
Home Commodityकच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से नीचे, आपात भंडार जारी करने की खबरों से गिरावट

कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से नीचे, आपात भंडार जारी करने की खबरों से गिरावट

by Business Remedies
0 comments
Oil pump shows signs of falling crude oil prices in the global market.

नई दिल्ली,

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को और गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट उस समय आई जब खबरें सामने आईं कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) कीमतों में तेज उछाल को नियंत्रित करने के लिए अपने इतिहास में सबसे बड़ा आपात भंडार जारी करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी को ठंडा करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार यदि यह निर्णय लागू होता है तो यह वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जारी किए गए 18.2 करोड़ बैरल तेल से भी बड़ा कदम होगा। उस समय वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए दो चरणों में तेल भंडार जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि सात देशों के समूह (जी-7) ने आईईए से इस तरह के संभावित कदम के लिए विभिन्न परिस्थितियों के आकलन तैयार करने को कहा है। बुधवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत लगभग 0.99 प्रतिशत गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिका के वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) वायदा भाव में भी 0.75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 82.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

इससे पहले रात के कारोबार में दोनों प्रमुख वायदा अनुबंधों में 11 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। पिछले चार वर्षों में एक ही दिन में यह सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर संभावित आपूर्ति बढ़ने की खबरों ने कीमतों पर दबाव बनाया है। दरअसल जनवरी से अब तक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की तेज बढ़त देखी गई थी। इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना था। यह रणनीतिक समुद्री मार्ग दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। मार्ग बंद होने के कारण कई तेल टैंकर समुद्र में फंस गए, भंडारण क्षमता भरने लगी और उत्पादकों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे ऊर्जा लागत में तेज बढ़ोतरी हुई। सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 120 डॉलर के करीब पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में इनमें गिरावट शुरू हुई, क्योंकि कारोबारियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।

इसी बीच अमेरिका-ईरान युद्ध दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और अभी तक समाधान के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें न बिछाए। रिपोर्टों में कहा गया था कि ईरान इस क्षेत्र में पहले ही बारूदी सुरंगें बिछा चुका है या इसकी तैयारी कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बारूदी सुरंग लगाई है तो उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करना स्थिति को सही दिशा में ले जाने की एक बड़ी पहल होगी। इस संघर्ष का आर्थिक असर अमेरिका में भी दिखाई देने लगा है। वहां पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी शुरू हो गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच अमेरिका के कुछ सांसदों ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत संघीय पेट्रोल कर को अस्थायी रूप से निलंबित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य आम परिवारों पर बढ़ते ईंधन खर्च के बोझ को कम करना है।



You may also like

Leave a Comment