Sunday, September 13, 2026 |
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पीएम-कुसुम योजना से किसानों को बड़ी राहत

देश में 10 लाख से अधिक सौर कृषि पंप स्थापित

by Business Remedies
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Solar powered agricultural pump and solar panels installed on the farm

नई दिल्ली, 

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-कुसुम योजना के तहत देश में सौर ऊर्जा आधारित कृषि व्यवस्था को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक देशभर में 10 लाख से अधिक स्वतंत्र सौर कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 13 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है।

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब सौर ऊर्जा धीरे-धीरे खेतों और घरों तक पहुंच रही है, जिससे किसानों को भरोसेमंद बिजली मिल रही है, सिंचाई की लागत घट रही है और कृषि उत्पादन में सुधार हो रहा है। मंत्री ने कहा कि आज कई किसान अपने खेतों की सिंचाई सौर ऊर्जा से कर रहे हैं और जो परिवार पहले बिजली बिल को लेकर चिंतित रहते थे, वे अब अपने घरों की छतों पर लगे सौर पैनलों से खुद ही बिजली तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का संकेत भी है।

सरकार के अनुसार कृषि क्षेत्र में सौर सिंचाई पंप विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। इन पंपों की मदद से किसान डीजल पर निर्भरता कम कर पा रहे हैं और दिन के समय भरोसेमंद सिंचाई सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में डीजल से सिंचाई करने पर गेहूं की फसल के लिए प्रति एकड़ लगभग 6 हजार 790 रुपये का खर्च आता है, जबकि कपास जैसी फसलों के लिए यह खर्च 8 हजार रुपये से अधिक हो सकता है। इसके मुकाबले सौर पंपों के उपयोग से किसानों को प्रति एकड़ हर वर्ष लगभग 5 हजार से 6 हजार 500 रुपये तक की बचत हो सकती है। इससे न केवल लागत कम होती है बल्कि प्रदूषण उत्सर्जन में भी कमी आती है। प्रह्लाद जोशी ने जानकारी दी कि सरकार पीएम-कुसुम योजना का नया संस्करण तैयार कर रही है। प्रस्तावित पीएम-कुसुम 2.0 में 10 गीगावाट की विशेष कृषि-सौर परियोजना को शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत खेतों में फसलों के साथ सौर पैनल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि किसान एक ही भूमि पर खेती जारी रखते हुए बिजली भी तैयार कर सकें।

उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन और कृषि को एक साथ जोड़ने से भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार भारत में कृषि-सौर क्षमता लगभग 3 हजार गीगावाट से लेकर करीब 14 हजार गीगावाट तक हो सकती है, जो इस क्षेत्र में बड़े अवसर का संकेत देती है। मंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत अब तक 31 लाख से अधिक घरों में छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इससे परिवार अपनी जरूरत की बिजली स्वयं तैयार कर पा रहे हैं और उनके बिजली बिल में भी कमी आ रही है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता वर्ष 2014 में लगभग 81 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 275 गीगावाट हो गई है। वर्तमान में भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रहा है। इसी अवधि में सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2.8 गीगावाट से बढ़कर करीब 143 गीगावाट तक पहुंच गई है। पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 21 गीगावाट से बढ़कर करीब 55 गीगावाट हो गई है, जबकि जैव ऊर्जा क्षमता 8.1 गीगावाट से बढ़कर लगभग 12 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि देश में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार को दर्शाती है।



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