नई दिल्ली,
देश में रोजगार के अवसरों को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में नियोक्ताओं का भर्ती का अनुमान अप्रैल–जून तिमाही के लिए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां आने वाले समय में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने को लेकर पहले से ज्यादा आशावादी हैं। वैश्विक मानव संसाधन कंपनी मैनपावरग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी तिमाही के लिए नेट रोजगार अनुमान 68 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह आंकड़ा पिछली तिमाही की तुलना में 17 अंक अधिक है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इसमें 24 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत किए गए कर सुधारों से भी कंपनियों को फायदा मिल रहा है। इन कारणों से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आई है और कंपनियां अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्त और बीमा क्षेत्र में भर्ती की संभावना सबसे अधिक मजबूत दिखाई दी है। इस क्षेत्र में रोजगार अनुमान 71 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछली तिमाही की तुलना में 8 अंक अधिक है और पिछले वर्ष की तुलना में 26 अंकों की बढ़ोतरी को दर्शाता है। वहीं उपयोगिता सेवाओं और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में तिमाही आधार पर सबसे बड़ी सुधार देखने को मिली है। इस क्षेत्र का रोजगार अनुमान 22 अंक बढ़ा है और यह वर्ष 2021 की अंतिम तिमाही के बाद चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके विपरीत आतिथ्य क्षेत्र में भर्ती को लेकर कंपनियों का रुख सबसे सतर्क रहा। इस क्षेत्र का रोजगार अनुमान केवल 31 प्रतिशत रहा, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है।
वाहन उद्योग में सबसे अधिक नई नौकरियों की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल नई नौकरियों के मामले में वाहन उद्योग सबसे आगे रहने की संभावना है। इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। मैनपावरग्रुप भारत और मध्य पूर्व के प्रबंध निदेशक संदीप गुलाटी ने कहा कि रिपोर्ट भारत के श्रम बाजार की दोहरी स्थिति को दर्शाती है। एक ओर कंपनियों का रोजगार को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर योग्य प्रतिभाओं की कमी भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि 82 प्रतिशत संगठनों को आवश्यक कौशल वाले कर्मचारियों को ढूंढने में कठिनाई हो रही है। क्षेत्रीय आधार पर देखें तो उत्तर भारत में भर्ती का अनुमान सबसे मजबूत रहा है। यहां नेट रोजगार अनुमान 70 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछली तिमाही से 12 अंक अधिक है और पिछले वर्ष की तुलना में 26 अंक की बढ़ोतरी को दर्शाता है। पूर्वी भारत में तिमाही आधार पर सबसे तेज सुधार दर्ज किया गया। यहां रोजगार अनुमान 20 अंक बढ़ा है और यह वर्ष 2012 की तीसरी तिमाही के बाद एक दशक से अधिक समय का सबसे ऊंचा स्तर है।
बड़ी कंपनियों में भर्ती को लेकर सबसे ज्यादा आशावाद
कंपनियों के आकार के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि सभी श्रेणियों के संगठन कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने को लेकर सकारात्मक हैं। विशेष रूप से वे बड़ी कंपनियां जिनमें 250 से 999 कर्मचारी कार्यरत हैं, उनमें सबसे अधिक आशावाद देखा गया। इस श्रेणी में रोजगार अनुमान 71 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही से 15 अंक अधिक है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग 87 प्रतिशत संगठन कर्मचारियों की भर्ती, नियुक्ति प्रक्रिया या प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहे हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग औसतन 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस क्षेत्र में सबसे अधिक उपयोग चीन में 95 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर है, जहां कंपनियां तेजी से नई तकनीक को अपनाकर भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

