भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुआ Free Trade Agreement (FTA) देश का पहला महिला नेतृत्व वाला व्यापार समझौता बन गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
उन्होंने बताया कि इस समझौते की वार्ता टीम में अधिकतर महिलाएं शामिल थीं, जिनमें मुख्य वार्ताकार, उप-वार्ताकार और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख शामिल थीं। यह कदम व्यापार वार्ताओं में लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के नेतृत्व में यह समझौता केवल नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। न्यूज़ीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले और दोनों देशों की टीमों के प्रयासों से यह संभव हो पाया। यह समझौता आपसी विश्वास, साझा लक्ष्य और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस समझौते के तहत भारत के निर्यात को न्यूज़ीलैंड में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग, किसानों, महिलाओं, युवाओं और पेशेवरों को बड़ा लाभ होगा। साथ ही, यह समझौता भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए संतुलित ढांचा भी प्रदान करता है। पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना है, जिससे व्यापार, सेवाओं, निवेश, नवाचार, कृषि उत्पादकता और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। इससे कुशल प्रतिभाओं और छात्रों के लिए नए अवसर भी बनेंगे।
यह समझौता कार्यरत पेशेवरों और छात्रों की आवाजाही को भी आसान बनाएगा। पहली बार न्यूज़ीलैंड ने किसी देश के साथ छात्र गतिशीलता और पढ़ाई के बाद कार्य वीज़ा पर समझौता किया है। इसके तहत भारतीय छात्र पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम कर सकेंगे और पढ़ाई के बाद विस्तारित वर्क वीज़ा का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, इस समझौते में कुशल भारतीयों के लिए 5000 वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत वे तीन वर्षों तक विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर सकेंगे। इसमें आयुष चिकित्सक, योग प्रशिक्षक, शेफ, संगीत शिक्षक, तथा सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
वर्किंग हॉलिडे वीज़ा कार्यक्रम के तहत हर वर्ष 1000 युवा भारतीयों को 12 महीनों तक न्यूज़ीलैंड में कई बार प्रवेश की अनुमति मिलेगी। भारत ने इस समझौते में अपने हितों की रक्षा करते हुए डेयरी उत्पाद जैसे दूध, क्रीम, दही, पनीर और कृषि उत्पाद जैसे प्याज को इसमें शामिल नहीं किया है। यह समझौता विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने, भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक सहयोग का नया उदाहरण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

