Monday, August 17, 2026 |
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भारत को भौतिक ढांचे के साथ बौद्धिक ढांचे में भी करना होगा निवेश : प्रणव अडानी

by Business Remedies
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Pranav Adani Speaking About India's Need For Intellectual Infrastructure Alongside Physical Infrastructure At Chintan Research Foundation Event

भारत को केवल सड़कों, बंदरगाहों और अन्य भौतिक सुविधाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश को अपने बौद्धिक ढांचे को भी उतनी ही गंभीरता से मजबूत करना होगा। यह बात अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के निदेशक प्रणव अडानी ने नई दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे संस्थानों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, जो केवल तात्कालिक घटनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देने, उभरते जोखिमों की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच बनने वाले संबंधों को समझने की क्षमता रखते हों। ऐसे संस्थान ही समाज को अनिश्चित परिस्थितियों से बाहर निकालने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रणव अडानी ने कहा कि जैसे-जैसे भारत सहित विभिन्न देशों का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनके सामने आने वाली चुनौतियां भी अधिक जटिल होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनसंख्या में बदलाव, शहरीकरण, जल संकट और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे विषय अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नीति निर्माताओं को निर्णय लेते समय समग्र और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और शोधकर्ता शामिल हुए। सभी ने तेज़ी से बदलती तकनीक, वैश्विक अनिश्चितता, जलवायु संबंधी चुनौतियों और आर्थिक परिवर्तन के दौर में नए विचारों, मजबूत संस्थानों और दीर्घकालिक सोच के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, तकनीकी बदलाव कामकाज और प्रशासन की प्रकृति को बदल रहे हैं, जलवायु परिवर्तन का असर अर्थव्यवस्था और समाज दोनों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर भी लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिवर्तन के ऐसे दौर में मजबूत विचार, प्रभावी संस्थान और तथ्यों पर आधारित स्वस्थ विमर्श सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे भारत विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे देश को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता होगी जो बौद्धिक ईमानदारी, स्पष्ट रणनीति और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि जब दुनिया अनिश्चित होती है, तब विचारों का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में शोध संस्थान नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और आम नागरिकों को भविष्य से जुड़े जटिल निर्णयों को बेहतर ढंग से समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

नॉर्वे के पूर्व जलवायु एवं पर्यावरण मंत्री तथा वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध स्थिरता विशेषज्ञ एरिक सोलहाइम ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि जो देश विकास और स्थिरता के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में सफल होंगे, वही भविष्य में सबसे अधिक प्रगति करेंगे। उन्होंने साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार आधारित नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित सांसद डॉ. शशि थरूर ने कहा कि चिंतन रिसर्च फाउंडेशन ऐसे समय में अपनी भूमिका निभा रहा है, जब भारत को तेजी से बदलती दुनिया को स्पष्ट दृष्टि से समझने वाले संस्थानों की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया इतनी तेज़ गति से बदल रही है कि पारंपरिक सोच के आधार पर इन परिवर्तनों को समझना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभवों को नीति निर्माण और प्रशासन से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि देश की नीतियां केवल वैचारिक सोच तक सीमित न रहें और न ही अल्पकालिक वैश्विक रुझानों के प्रभाव में तैयार हों। इससे भारत अधिक प्रभावी, संतुलित और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप नीतियां तैयार कर सकेगा।



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