Friday, September 11, 2026 |
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भारत और केन्या ने कस्टम सहयोग बढ़ाने के लिए किया अहम समझौता, व्यापारिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

सीमा शुल्क सहयोग, तेज निकासी और बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए CBIC और KRA के बीच एमओयू साइन

by Business Remedies
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नैरोबी | बिजनेस रेमेडीज | भारत और केन्या के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को नैरोबी में आयोजित 10वीं भारत-केन्या संयुक्तव्यापार समिति (ज्वाइंट ट्रेड कमेटी) की बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच प्री-अराइवल इंफॉर्मेशन के आदान-प्रदान को लेकर एक अहम समझौता (एमओयू) साइन किया गया। यह समझौता भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या रेवेन्यू अथॉरिटी (केआरए) के बीच हुआ।

भारत केन्या (नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा, “यह समझौता सीमा शुल्क सहयोग को बढ़ावा देगा, निकासी प्रक्रिया को तेज करेगा, जोखिम प्रबंधन में सुधार करेगा और भारत और केन्या के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाएगा।” इस समझौते पर सीबीआईसी के सदस्य योगेंद्र गर्ग और केआरए की कमिश्नर जनरल डॉ. लिलियन न्यावांडा ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की ट्रेड प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेजिना अकोथ ओम्बाम भी मौजूद रहीं। इस एमओयू के जरिए कस्टम प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ेगा, माल की तेजी से क्लियरेंस हो सकेगी, जोखिम प्रबंधन बेहतर होगा और दोनों देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेजिना अकोथ ओम्बाम ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने, टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

भारत और केन्या ने फार्मास्युटिकल्स, कृषि, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, ऊर्जा (खासकर नवीकरणीय ऊर्जा) और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) में भी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

दोनों देशों ने एक संतुलित, विविध और भविष्य-केंद्रित आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, व्यापार को आसान बनाने, लंबित मुद्दों को सुलझाने और बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर भी सहमति बनी। यह समझौता भारत और केन्या के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर आर्थिक सहयोग को भी मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।



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