New Delhi,
भारत अब वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यह बदलाव बड़े स्तर के चिप निर्माण संयंत्रों के कारण नहीं, बल्कि देश में उपलब्ध कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभा और बढ़ती डिजाइन क्षमताओं के कारण हो रहा है। एक हालिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
डिजाइन और इंजीनियरिंग में भारत की बढ़ती ताकत
लंबे समय तक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने उन्नत निर्माण सुविधाओं के कारण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वर्चस्व बनाए रखा। वहीं जापान सामग्री और उपकरणों के क्षेत्र में अपनी मजबूती के लिए जाना जाता रहा है। इसके मुकाबले भारत को पहले अपेक्षाकृत छोटा खिलाड़ी माना जाता था। हालांकि अब विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की असली ताकत उसकी मानव पूंजी में है, विशेष रूप से चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एकीकृत परिपथ डिजाइन कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है। हर वर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्नातक देश में तैयार हो रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र को निरंतर मजबूती मिल रही है। इंटेल, एनविडिया और क्वालकॉम जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में अपने बड़े अनुसंधान एवं विकास केंद्र संचालित कर रही हैं, जहां हजारों इंजीनियर कार्यरत हैं। ये टीमें चिप डिजाइन, सत्यापन और एम्बेडेड सिस्टम पर कार्य करती हैं, जिससे कंपनियों को कम लागत में अपने संचालन का विस्तार करने में सहायता मिलती है।
मध्य स्तर की आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान
भारत अभी उच्च स्तरीय चिप निर्माण इकाइयों के विकास के प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसने आपूर्ति श्रृंखला के मध्य स्तर पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। इसमें संयोजन, परीक्षण, चिह्नांकन और पैकेजिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण माइक्रोन टेक्नोलॉजी है, जो गुजरात में लगभग 2.75 अरब डॉलर की लागत से एक बड़ा संयंत्र स्थापित कर रही है। यह रणनीति भारत को सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में तेजी से प्रवेश करने का अवसर देती है, साथ ही भविष्य में उन्नत निर्माण क्षमताएं विकसित करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
सरकार की पहल से क्षेत्र को बढ़ावा
सरकार भी इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत डिजाइन प्रतिभा को बढ़ावा देने, नवाचार कंपनियों को समर्थन देने और एक मजबूत चिप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डिजाइन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना है, जिसके माध्यम से चिप डिजाइन और विकास के लिए वित्तीय सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। भारत की नीतियों और दिशा पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा बढ़ता जा रहा है। ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिलकर गुजरात में देश का पहला वाणिज्यिक वेफर निर्माण संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है, जिसमें लगभग 11 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा।

