नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत आर्थिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन देश की विकास यात्रा को स्वाभाविक मान लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक और स्थायी आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लगातार नवाचार, सुधार और संस्थागत मजबूती बेहद आवश्यक है।
माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केवल आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसके साथ मजबूत संस्थान, प्रभावी नीतियां और सक्षम सहायता तंत्र भी जरूरी हैं, ताकि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था संतोषजनक स्थिति में है, लेकिन हमें लगातार अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन करते रहना चाहिए और उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहां अभी और सुधार की आवश्यकता है। उनका कहना था कि एक बड़े और जटिल देश की अर्थव्यवस्था को लगातार गति देने के लिए क्षमताओं को मजबूत करना, कार्यकुशलता बढ़ाना और विकास के लाभों को व्यापक स्तर तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, ऐसे में भारत की नीतिगत रूपरेखा मजबूत होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाली भी होनी चाहिए। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मान लेना गलत होगा कि प्रगति अपने आप जारी रहेगी। इसके लिए निरंतर प्रयास, नवाचार और सुधार की आवश्यकता बनी रहेगी। सीतारमण ने कहा कि जहां कई क्षेत्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं कुछ क्षेत्रों को अभी भी नीतिगत समर्थन और विशेष ध्यान की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल और मध्यवर्ती उत्पादों तथा सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में सुधार की काफी गुंजाइश है।
उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को यह लगातार समीक्षा करनी चाहिए कि लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है। इसके लिए संरचनात्मक सुधार, बेहतर क्रियान्वयन और नई नीतिगत रणनीतियों पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्षों से इन मुद्दों पर चर्चा होती रही है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आगे इन्हें किस प्रकार प्रभावी ढंग से हल किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत प्रतिक्रियाओं में भी आवश्यक बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को और मजबूत बनाने के लिए उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए है। कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके कुछ प्रभाव अब भी नीतिगत योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित कर रहे हैं, हालांकि फिलहाल किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार अल नीनो प्रभाव के कारण कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। यह पूरे वर्ष चिंता का विषय बना रह सकता है। सीतारमण ने कहा कि इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून देखने को मिल सकता है, इसलिए सरकार पहले से ही आवश्यक तैयारियों और रणनीतियों पर काम कर रही है, ताकि कृषि, खाद्य आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।

