Tuesday, March 10, 2026 |
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फरवरी में भारत की डील गतिविधियों में तेज उछाल

278 सौदे हुए, कुल मूल्य 5.4 अरब डॉलर

by Business Remedies
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भारत में कंपनियों के बीच निवेश और विलय अधिग्रहण सौदों की गतिविधि

नई दिल्ली,

भारत में फरवरी महीने के दौरान कंपनियों के बीच होने वाले सौदों की गतिविधियों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। एक नई रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में कुल 278 लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य लगभग 5.4 अरब डॉलर रहा। यह संख्या पिछले महीने की तुलना में सौदों की मात्रा के आधार पर लगभग 34 प्रतिशत अधिक रही, जिससे निवेश गतिविधियों में तेजी का संकेत मिलता है। परामर्श संस्था ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में सौदों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण निजी इक्विटी और वेंचर पूंजी निवेश रहा। इस अवधि में इन निवेशकों ने कुल 169 सौदे किए जिनका मूल्य लगभग 2.8 अरब डॉलर रहा। यह पिछले चार वर्षों में किसी एक महीने में दर्ज की गई सबसे अधिक डील संख्या मानी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार कुल सौदों के मूल्य में भले ही सीमित सुधार देखा गया हो, लेकिन सौदों की संख्या में तेज बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हो रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश का विस्तार हो रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि फरवरी में विलय और अधिग्रहण गतिविधियों में भी सुधार देखने को मिला। इस दौरान कुल 104 सौदे हुए जिनका कुल मूल्य लगभग 2 अरब डॉलर रहा। इन सौदों में घरेलू कंपनियों के बीच होने वाले सौदे प्रमुख रहे और कई क्षेत्रों में रणनीतिक विस्तार तथा आकार बढ़ाने के उद्देश्य से कंपनियों ने एकीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए। ग्रांट थॉर्नटन भारत की ग्रोथ इकाई की भागीदार शांति विजेता के अनुसार घरेलू कंपनियों के बीच एकीकरण का रुझान काफी मजबूत रहा। कुल विलय और अधिग्रहण सौदों में लगभग 69 प्रतिशत हिस्सेदारी मात्रा के आधार पर घरेलू सौदों की रही, जबकि कुल मूल्य के आधार पर इनकी हिस्सेदारी करीब 78 प्रतिशत रही।

भूराजनीतिक तनाव और कमजोर रुपया बने जोखिम कारक

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और रुपये की कमजोरी जैसे कारक पूंजी प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की धारणा पर अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकते हैं। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद देश के भीतर मजबूत तरलता, कंपनियों की संतुलित वित्तीय स्थिति और भारत के प्रति वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण आने वाले समय में निवेश गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है।

छोटे निवेश सौदों की ओर बढ़ता रुझान

फरवरी में निजी इक्विटी और वेंचर पूंजी से जुड़ी गतिविधियों ने कुल डील गतिविधि को गति दी, लेकिन औसत सौदे का आकार घट गया। जनवरी में जहां औसत सौदे का आकार लगभग 21.6 मिलियन डॉलर था, वहीं फरवरी में यह घटकर लगभग 16.6 मिलियन डॉलर रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक इस समय अपेक्षाकृत छोटे आकार के निवेश सौदों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पूंजी जुटाने के अन्य माध्यमों में थोड़ी नरमी देखने को मिली। फरवरी में केवल तीन प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम हुए जिनके जरिए कुल 436 मिलियन डॉलर जुटाए गए। वहीं दो योग्य संस्थागत प्लेसमेंट के माध्यम से लगभग 139 मिलियन डॉलर की पूंजी जुटाई गई। यह स्थिति दर्शाती है कि निवेशकों के बीच अभी भी सतर्कता बनी हुई है।

ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में सबसे तेज वृद्धि

क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस क्षेत्र में सौदों की संख्या में महीने-दर-महीने आधार पर लगभग 217 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल सौदों का मूल्य लगभग तीन गुना तक बढ़ गया। फरवरी में खुदरा और उपभोक्ता क्षेत्र में सबसे अधिक 63 सौदे दर्ज किए गए, जो कुल सौदों का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा रहा। हालांकि इस क्षेत्र में कुल सौदों का मूल्य लगभग 38 प्रतिशत घट गया। इसका प्रमुख कारण वस्त्र, तेज़ उपभोग वस्तु और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े क्षेत्रों में अपेक्षाकृत छोटे सौदों का होना रहा। इसके अलावा आधारभूत संरचना, अंतरिक्ष एवं रक्षा तथा पेशेवर सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश गतिविधियों में सुधार देखने को मिला। वहीं बड़े सौदों की कमी के कारण अचल संपत्ति क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई। अन्य कई क्षेत्रों में सौदों की संख्या स्थिर रही लेकिन उनके कुल मूल्य में कुछ कमी देखने को मिली।



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