New Delhi,
भारत का निर्माण सामग्री बाजार वर्ष 2030 तक लगभग 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में 57 अरब डॉलर के आधार से अगले पांच वर्षों में 10 से 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के सहारे यह बाजार लगभग दोगुना हो सकता है।
निवेश बैंक एवेंडस कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बिकने वाले विद्युत उपकरण इस क्षेत्र में सबसे बड़ा अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं। तार और केबल खंड में मध्यम किशोर स्तर की चक्रवृद्धि वृद्धि दर रहने की उम्मीद है, जिसे बिजली ग्रिड के उन्नयन, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन ढांचा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पेंट और कोटिंग्स सबसे संगठित और लाभदायक खंडों में शामिल हैं, जहां 14 से 19 प्रतिशत परिचालन लाभ मार्जिन दर्ज किया जा रहा है। वहीं टाइल्स और स्नानगृह उत्पाद निर्यात प्रतिस्पर्धा का लाभ उठा रहे हैं। भारतीय टाइल्स और स्नानगृह उत्पादों की वैश्विक टाइल निर्यात में मात्रा के आधार पर लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे उत्पाद गुणवत्ता और विविधता से मजबूती मिली है।
लकड़ी पैनल क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। मीडियम डेंसिटी फाइबर बोर्ड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 में 20 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है और वर्ष 2030 तक इसके लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि के पीछे मॉड्यूलर निर्माण और कम अवधि में बदलाव की प्रवृत्ति प्रमुख कारण मानी जा रही है। फर्नीचर फिटिंग्स और वास्तु हार्डवेयर खंड निर्माण सामग्री बाजार का सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा बनकर उभरा है। इसमें काज, दराज प्रणाली और रसोई प्रणाली जैसे उत्पाद शामिल हैं। यह खंड वित्त वर्ष 2025 में 25 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें 14 से 16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रहने की संभावना है।
प्लास्टिक पाइप, फिटिंग्स और टैंक क्षेत्र में भी तेजी से एकीकरण हो रहा है और संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एवेंडस कैपिटल के औद्योगिक निवेश बैंकिंग प्रमुख कौशिक भट्टाचार्य ने कहा कि निर्माण सामग्री क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख स्तंभों—रियल एस्टेट और उपभोग—के संगम पर स्थित है। अब उपभोक्ता घर को केवल उपयोग की वस्तु नहीं बल्कि दीर्घकालिक जीवनशैली संपत्ति के रूप में देख रहे हैं, जिससे ब्रांडेड और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर खर्च बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन सकारात्मक रुझानों के बावजूद भारत में निर्माण सामग्री की खपत वैश्विक मानकों की तुलना में अभी भी संरचनात्मक रूप से कम है, जिससे दीर्घकाल में विस्तार की व्यापक संभावनाएं बनी हुई हैं।

