आनुवंशिक रक्तस्राव विकारों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, निदान में सुधार और सभी के लिए बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए आज विश्व हीफोफीलिया दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष की थीम- निदान- देखभाल का पहला कदम है। यह थीम इस बात पर जोर देता है कि हीमोफीलिया और अन्य वंशानुगत रक्तस्राव विकारों के लिए सही और समय पर निदान सबसे महत्वपूर्ण पहला कदम है। बिना निदान के उपचार संभव नहीं होता और लाखों लोग अभी भी अज्ञात रह जाते हैं। विश्व हीमोफीलिया महासंघ के अनुसार, दुनिया भर में हीमोफीलिया से पीडि़त लोगों में से 75 फीसदी तक का निदान नहीं हो पाता। उनके रक्त में क्लॉटिंग फैक्टर की कमी आ जाती है। इससे छोटी-मोटी चोट पर भी अनियंत्रित रक्तस्राव हो सकता है, जो जोड़ों, मांसपेशियों में रक्तस्राव, दर्द, विकलांगता और गंभीर मामलों में मृत्यु का कारण बन सकता है। यह मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करता है, लेकिन महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। दिवस की शुरुआत 1989 में विश्व हीमोफीलिया महासंघ की ओर से की गई थी। 17 अप्रैल की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि यह डब्ल्यूएफएच के संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल का जन्मदिन है। फ्रैंक श्नाबेल स्वयं गंभीर हीमोफीलिया ए से पीडि़त थे और उन्होंने वर्ष,1963 में डब्ल्यूएफएच की स्थापना की ताकि दुनिया भर में हीमोफीलिया से पीडि़त लोगों की स्थिति सुधारे जा सके। वर्ष,1989 से हर साल यह दिवस मनाया जा रहा है, जो इस साल 37वां वर्ष पूरा कर रहा है। शुरू में यह मुख्य रूप से हीमोफीलिया पर केंद्रित था, लेकिन अब इसमें सभी वंशानुगत रक्तस्राव विकार शामिल हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है, जो सौ से अधिक देशों में रोगी संगठनों से जुड़ा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मान्यता प्राप्त है।




