केंद्र सरकार रक्षा सौदे को बढ़ावा देने के लिए लगातार पहल कर रही है। पिछले दिनों ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका दौरे के दौरान भारत और अमेरिका में महत्वपूर्ण डिफेंस डील पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने को लेकर सिक्योरिटी ऑफ सप्लाई अरेंजमैंट समझौता हुआ है। यह समझौता भारतीय रक्षा विभाग को अमेरिका की कम्पनियों के साथ अनुबंध करने की अनुमति देता है। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे को जरूरत पडऩे पर महत्वपूर्ण समान, खनिज और टेक्नॉलोजी दे सकते हैं। भारत,अमेरिका के साथ ऐसा समझौता करने वाला 18वां देश है। इसके अलावा दोनों देश संयुक्त रूप से लड़ाकू जेट इंजन के उत्पादन पर आगे बढऩे को सहमत हुए हैं। अनमैन्ड प्लेटफार्म, आधुनिक हथियार, ग्राउंड मोबिलिटी सिस्टम आदि के सह उत्पादन को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। अमेरिका भारत को एंटी सबमरीन हथियार सोनोवॉय और उससे सम्बन्धित उपकरण की बिक्री करेगा। वहीं जहां चीन ने हाल में अपनी सबसे आधुनिक सबमरीन को सेना में शामिल किया है। चीन के पास 48 डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन हैं। चीन पर इनकी मदद से हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में जासूसी करने का आरोप है। भारत अमरीका के बीच हुए इस एंटी सबमरीन समझौते से चीन पर नकेल कसी जा सकेगी। सोनोबॉय एक बहुत ही अत्याधुनिक पोर्टेबल सोनार सिस्टम है। इसे दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए विमान, हेलिकॉप्टर या युद्धपोत से पानी में डाला जाता है। यह एक्टिव, पैसिव और स्पेशल पर्पस सोनोबॉय होते हैं। यह पनडुब्बी की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है। दुश्मन की पनडुब्बी इससे छिप नहीं पाती है। जहां तक जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन का सवाल है उसमें देरी हो रही थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संबंध में अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के साथ बातचीत भी की है। एक उभरती हुई विश्व व्यवस्था के रूप में भारत ने कई वर्षों के भीतर हेलिकॉप्टर निर्माण, मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम में कई मुकाम हासिल किए हैं। भारत ने एक लड़ाकू जेट भी डिजाइन और निर्माण किया, लेकिन जेट को ताकतवर बनाने के लिए इंजन निर्माण में बहुत ज्यादा सफलता हासिल नहीं की। भारत-अमेरिका में हुए समझौतों से दोनों देशों को डिफेंस सैक्टर में फायदा होगा। दोनों देशों के डिफेंस इको सिस्टम भी आपस में जुड़ जाएंगे। भारतीय कम्पनियों के लिए भी महत्वपूर्ण व्यवसायिक अवसर खुलने की सम्भावना है।

