कुंजेश कुमार पतसारिया बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। मेहनत और लगन के साथ सेवा भावना के लक्ष्य को लेकर जोनटेक इंस्टीट्यूट शुरू कर करण सिंह यादव ने अपनी अलग पहचान कायम की है। शुरुआत में चुनौतियां तो आई पर इन्होंने इसका डटकर मुकाबला कर इसे अपग्रेड कर इंस्टीट्यूट में डिजिटल माध्यमों को अपनाकर अपना वर्चस्व कायम किया है। वर्तमान में जोनटेक संस्थान के माध्यम से कई छात्र, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता की जॉनिंग भी ले चुके हैं।
आपकी शैक्षणिक गतिविधियों को बताएं। कहां से शिक्षा ग्रहण की और कहां तक की है?
मैंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई टैगोर सीनियर सैकेंडरी स्कूल, खेरली, अलवर से पूरी की। इसके बाद मैंने राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बी.टेक किया और फिर उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी बीएचयू से एम.टेक की डिग्री प्राप्त की। मेरी शैक्षणिक यात्रा ने मुझे तकनीकी दृष्टिकोण के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता और समस्या समाधान की दृष्टि भी प्रदान की।
इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट खोलने की प्रेरणा कहां से मिली? इसका अनुभव कहां से लिया और इंस्टीट्यूट में क्या-क्या पढ़ाया जाता है? वर्तमान में कितने स्टूडेंट तैयारी कर रहे हैं?
इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट खोलने की प्रेरणा मुझे मेरे खुद के छात्र जीवन से मिली। मैंने महसूस किया कि राजस्थान जैसे राज्यों में ए.ईएन और जे.ईएन जैसी परीक्षाओं की टारगेटेड तैयारी के लिए समर्पित प्लेटफॉर्म की कमी है। इसी विचार से मैंने जोनटेक की शुरुआत की, जहां सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं बल्कि विचारशीलता, रणनीति और आत्मविश्वास भी सिखाया जाता है। यहां हम मुख्य रूप से सहायक अभियंता (ए.ईएन) और कनिष्ठ अभियंता (जे.ईएन) की परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, जिसमें टेक्निकल विषयों के साथ-साथ टेस्ट सीरीज, इंटरव्यू प्रिपरेशन और काउंसलिंग भी शामिल है। वर्तमान में 2500+ छात्र जोनटेक में अपनी तैयारी कर रहे हैं, जो हमारे प्रयासों और छात्रों के विश्वास का परिणाम है।
वर्तमान में प्रतिस्पर्धा के युग में आपके समक्ष कोई चुनौतियां सामने आई, अगर आई तो उसका समाधान किस तरह से किया?
शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती थी, छात्रों का विश्वास अर्जित करना और गुणवत्ता में निरंतरता बनाए रखना। हमने इसका समाधान अनुशासित ढंग से पढ़ाई कराने, पारदर्शिता बनाए रखने और फैकल्टी को लगातार प्रशिक्षित करके किया। इसके साथ-साथ हमने डिजिटल माध्यमों (एप, ऑनलाइन क्लासेज, वीडियो लेक्चर) को भी अपनाया, जिससे दूर-दराज के छात्र भी लाभान्वित हो सकें।
सामाजिक सरोकार के कोई कार्य किए हो तो बताएं?
जोनटेक के माध्यम से हमने ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को नि:शुल्क गाइडेंस और स्कॉलरशिप देने की पहल की है। हम समय-समय पर नि:शुल्क सेमिनार, कॅरियर काउंसलिंग कैंप और युवाओं के लिए मोटिवेशनल वर्कशॉप भी आयोजित करते हैं, जिससे शिक्षा का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
आपके आदर्श कौन हैं?
मेरे आदर्श डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हैं। उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और विनम्रता को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया। वह मेरे लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। उनकी सोच ” सपने वो नहीं, जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं, जो आपको सोने नहीं देते”।
भविष्य में व्यवसाय को कहां तक विस्तार देना चाहते हैं?
हमारा लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में जोनटेक को राजस्थान का ही नहीं, बल्कि भारत का अग्रणी तकनीकी प्रतियोगी संस्थान बनाया जाए। हम अधिक से अधिक जिलों में ब्रांच खोलना, ऑनलाइन कोर्सेज और टेक्निकल रिसर्च मॉडल को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिससे हर छात्र तक हमारी गुणवत्ता पहुंचे।
नए युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे, जिससे वह अपने व्यवसाय को उत्तरोतर बढ़ा सकें?
मेरा नए युवाओं से सुझाव यही है कि अगर वे कोई संस्थान शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले समस्या को समझिए और समाधान पर केंद्रित रहिए। व्यापार से पहले सेवा की भावना रखेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। ईमानदारी, गुणवत्ता और निरंतर सुधार, यही किसी भी संस्थान की असली पूंजी होती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सोच बड़ी रखिए।
सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं, ताकि आपके व्यवसाय को और गति मिल सके।
सरकार से हमारी यही अपेक्षा है कि वह तकनीकी शिक्षा और इंजीनियरों के सम्मानजनक भविष्य के लिए ठोस नीतियां बनाए। हाल ही में संविदा आधार पर जो पद निकाले गए हैं, मैं उसका पुरजोर विरोध करता हूं। यह ना केवल इंजीनियरों के साथ अन्याय है, बल्कि उनकी क्षमता, योग्यता और मेहनत के विपरीत एक अपमानजनक स्थिति है। एक इंजीनियर देश के निर्माण और तकनीकी प्रगति की रीढ़ होता है। उसे स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी मिलनी चाहिए, ना कि अस्थायी संविदा व्यवस्था जिसमें ना वेतन उचित है और ना कार्य संतुलित। यह स्थिति युवाओं में निराशा और असंतोष पैदा करती है। मैं सरकार से आग्रह करता है कि वह इंजीनियरिंग पदों को स्थायी रूप में भरने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दे, तकनीकी कर्मचारियों की वेतन संरचना और कार्यदायित्व को योग्यता के अनुरूप बनाए और निजी तकनीकी संस्थानों को स्कॉलरशिप, रिसोर्स और पीपीपी मॉडल में भागीदारी के अधिक अवसर दे। हमें मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना है, जहां इंजीनियर गर्व से कह सके ” मैं देश की तकनीकी नींव हूं।”

