Wednesday, August 12, 2026 |
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शिक्षा के माध्यम से बच्चों को सशक्त बनाना: डॉ. प्रभा शर्मा की यात्रा और दृष्टि

by Business Remedies
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चारु भाटिया | जयपुर 

शिक्षा केवल अकादमिक उपलब्धियां हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ऐसे व्यक्तित्व के निर्माण की प्रक्रिया है, जो स्वतंत्र रूप से सोच सकें, जिम्मेदार निर्णय ले सकें और समाज में सार्थक योगदान दे सकें। शांति विद्या निकेतन स्कूल, जयपुर की डायरेक्टर डॉ. प्रभा शर्मा के लिए शिक्षा के क्षेत्र में उनकी यात्रा एक साधारण विचार से शुरू हुई, जो समय के साथ अनुभव में बदला और फिर एक ऐसे सपने में परिवर्तित हो गया, जिसमें बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

इस विशेष बातचीत में डॉ. प्रभा शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी यात्रा, संस्थान की विचारधारा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, तकनीक और एआई की भूमिका, बदलते शिक्षण तरीकों तथा आने वाले वर्षों के लिए अपनी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

प्रश्न: शिक्षा के क्षेत्र में आपकी यात्रा कैसी रही और स्कूल स्थापित करने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

उत्तर: शिक्षा के क्षेत्र में मेरी यात्रा एक साधारण विचार से शुरू हुई। समय के साथ यही साधारण विचार मेरा अनुभव बना और मेरा अनुभव धीरेधीरे मेरे सपने में बदल गया। इसी सपने ने मुझे एक ऐसी संस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया, जहां बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ एक सकारात्मक वातावरण मिल सके। मैं चाहती थी कि बच्चे अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

मेरे लिए शिक्षा हमेशा से केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही है। मैं ऐसा वातावरण बनाना चाहती थी, जहां बच्चे सीखने के लिए प्रेरित हों, अपनी क्षमताओं को तलाश सकें और आत्मविश्वासी व्यक्तित्व के रूप में विकसित हो सकें। यही विचार धीरेधीरे एक शिक्षाविद के रूप में मेरी यात्रा की नींव बना और अंततः स्कूल स्थापित करने की प्रेरणा बना।

प्रश्न: स्कूल की शुरुआत करते समय आपके मन में किस तरह की शैक्षणिक संस्था की परिकल्पना थी और आज वह दृष्टि किस रूप में विकसित हुई है?

उत्तर: जब मैंने स्कूल की शुरुआत की थी, तब मेरी दृष्टि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मजबूत संस्कार देना थी। समय के साथ मेरा दृष्टिकोण भी विकसित हुआ। मैंने महसूस किया कि अकादमिक शिक्षा के साथसाथ गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान देना भी जरूरी है, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहें।

मेरा मानना है कि शिक्षा को समाज की बदलती जरूरतों के अनुरूप विकसित होना चाहिए। अकादमिक उत्कृष्टता महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों को ऐसी गतिविधियों, अनुभवों और परिस्थितियों से भी परिचित कराया जाना चाहिए, जो उन्हें अपने आसपास की दुनिया को समझने में मदद करें। हमारा प्रयास एक ऐसे संतुलित शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना है, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का भी समावेश हो।

प्रश्न: आपके संस्थान की शैक्षणिक विचारधारा और मूल मूल्य क्या हैं?

उत्तर: हमारे स्कूल का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, अच्छे संस्कार और मेहनत जैसे मूल्यों पर आधारित है। मेरा मानना है कि बच्चों को केवल अकादमिक ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अच्छा व्यवहार करना, दूसरों का सम्मान करना और सही निर्णय लेना भी सिखाया जाना चाहिए।

मेरे संस्थान की नींव एक सरल लेकिन गहन विचार पर आधारित हैविद्या विनयेन शोभते, अर्थात ज्ञान विनम्रता से सुशोभित होता है। शिक्षा बच्चे को ज्ञानवान बनाने के साथसाथ विनम्र, अनुशासित और जिम्मेदार भी बनाए, यही हमारा प्रयास है। हम चाहते हैं कि विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ सम्मान, मेहनत, ईमानदारी और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को भी समझें।

प्रश्न: आज भारतीय स्कूल शिक्षा व्यवस्था में आपको सबसे बड़ी कमियां क्या दिखाई देती हैं?

उत्तर: मेरे विचार से भारतीय स्कूल शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमियों में से एक यह है कि कई स्थानों पर शिक्षा अभी भी अंकों पर अत्यधिक केंद्रित है। शैक्षणिक प्रदर्शन महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल अंक किसी बच्चे की क्षमता, बुद्धिमत्ता या प्रतिभा को परिभाषित नहीं कर सकते।

बच्चों को उनकी रुचियों के अनुसार सीखने, व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने और स्वतंत्र सोच विकसित करने के अधिक अवसर दिए जाने चाहिए। हर बच्चा अलग होता है और उसकी क्षमताएं तथा रुचियां भी अलग होती हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को बच्चों को अपनी विशेष प्रतिभाओं को पहचानने के पर्याप्त अवसर देने चाहिए। हमें केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा के बजाय समग्र विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रश्न: तकनीक और एआई शिक्षा को तेजी से बदल रहे हैं। आपका स्कूल इन बदलावों के साथ किस तरह तालमेल बिठा रहा है?

उत्तर: मेरा मानना है कि तकनीक शिक्षकों का विकल्प नहीं है, बल्कि शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसी सोच के साथ हमारे स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सामग्री और ऑडियोविजुअल संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि बच्चों के लिए सीखना आसान और अधिक रोचक बन सके।

साथ ही, हम बच्चों को यह भी सिखाते हैं कि एआई का इस्तेमाल उनकी सोचने की क्षमता को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। तकनीक को जिज्ञासा और रचनात्मकता को बढ़ावा देना चाहिए, कि स्वतंत्र सोच का स्थान लेना चाहिए। हमारा मूल दर्शन हैपरंपरा से संस्कार, तकनीक से नवाचार और शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य।

हम चाहते हैं कि बच्चे नई तकनीकों से मिलने वाले अवसरों के साथ उनकी जिम्मेदारियों को भी समझें। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से जागरूक बनाना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि शिक्षा के केंद्र में मानवीय मूल्य हमेशा बने रहें।

प्रश्न: NEP 2020 को लेकर आपके क्या विचार हैं? क्या इसे सही तरीके से लागू किया जाए तो सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं?

उत्तर: मेरे विचार से राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। इसमें बच्चों की समझ, कौशल और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया गया है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका विद्यार्थियों को काफी लाभ मिल सकता है।

मेरा मानना है कि NEP 2020 का उद्देश्य केवल शिक्षित विद्यार्थियों को तैयार करना नहीं है, बल्कि सक्षम, रचनात्मक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा और शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण पर जोर बच्चों को भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद कर सकता है।

प्रश्न: संस्थान का निर्माण और संचालन करते समय आपको किन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उत्तर: किसी संस्थान का निर्माण और सफल संचालन कई चुनौतियों से भरा होता है। इनमें उचित संसाधनों की व्यवस्था करना, सक्षम और समर्पित शिक्षकों की टीम तैयार करना, विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास हासिल करना, बदलती शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालना और नई तकनीक एवं ज्ञान से लगातार अपडेट रहना प्रमुख चुनौतियां रही हैं।

एक शैक्षणिक संस्थान धीरेधीरे विकसित होता है। इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता आवश्यक है। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक संस्थान के मूल मूल्यों और आधुनिक शिक्षा की बदलती अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना रहा है।

प्रश्न: तेजी से प्रतिस्पर्धी होते शिक्षा क्षेत्र में आपका स्कूल अन्य संस्थानों से किस तरह अलग है?

उत्तर: आज शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। कई बार इस प्रतिस्पर्धा में बच्चे केवल अंकों के आधार पर आंके जाने लगते हैं और उनकी व्यक्तिगत प्रतिभाओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता।

हालांकि, मेरी टीम और मेरा मानना है कि हर बच्चा विशेष होता है। हमारा प्रयास प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट खूबियों को पहचानना और उसे सही दिशा देना है। जैसा कि कहा गया हैयादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशीहमारी उपलब्धियां हमारी सोच और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होती हैं।

हमारे स्कूल में समयसमय पर कार्यक्रम, कार्यशालाएं और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को किशोर अपराध, युवा हिंसा, बालिकाओं की सुरक्षा, नशे की समस्या और साइबर अपराध जैसे समकालीन मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाता है। हमारा मानना है कि बच्चों को अपने आसपास की चुनौतियों की जानकारी होनी चाहिए और उन्हें जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए आवश्यक ज्ञान और संस्कार भी दिए जाने चाहिए।

प्रश्न: आने वाले वर्षों में संस्थान को मजबूत करने या विस्तार देने के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

उत्तर: आने वाले वर्षों में हमारा मुख्य ध्यान स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने पर रहेगा। हम नई तकनीकों को अपनाने, सुविधाओं में सुधार करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और बच्चों के लिए सीखने के नए अवसर तैयार करने की दिशा में लगातार काम करेंगे। हमारा लक्ष्य केवल स्कूल के भौतिक ढांचे का विस्तार करना नहीं है, बल्कि एक मजबूत और बेहतर शैक्षणिक संस्थान का निर्माण करना है। 

प्रश्न: अंत में, विद्यार्थियों के लिए आपका क्या संदेश है कि सार्थक शिक्षा का वास्तविक अर्थ क्या होना चाहिए?

उत्तर: मेरे अनुसार सार्थक शिक्षा का वास्तविक अर्थ हैशिक्षा केवल वह नहीं है जो हमें कमाना सिखाती है; शिक्षा वह है जो हमें जीना और सही दिशा में आगे बढ़ना सिखाती है।

शिक्षा बच्चों को जीवन का सामना करने का आत्मविश्वास, सही निर्णय लेने की समझ और दूसरों का सम्मान करने की विनम्रता देनी चाहिए। अकादमिक ज्ञान निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन सच्ची शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी विकास करती है।

जैसा कि विद्वानों ने भी कहा हैविद्या धनं सर्वधनं प्रधानम्, अर्थात ज्ञान सभी प्रकार के धन में सबसे श्रेष्ठ है।



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