वैशाख माह में ही गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। ज्येष्ठ के महीने शुरू होने में अभी करीब दस दिन शेष है। दोपहर बारह बजे बाद सडक़ों पर सन्नाटा पसर जाता है। लोग जरूरी काम से ही बाहर निकलते हैं। जहां मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष, 2026 में अलनीनो की स्थिति के कारण बारिश कम होने और गर्मी बढऩे की संभावना है, जो सुपर अल नीनो के रूप में भी सामने आ सकती है। ऐसे में गर्मी से बचाव ही सर्वोत्तम उपाय है। वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण लू की तीव्रता और अवधि बढ़ गई है। भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप शुरू हो चुका है, जहां तापमान 40 से 45 सेंटीग्रेट तक पहुंच गया है। उत्तर भारत, Rajasthan, Gujarat, Maharashtra, और मध्य भारत के कई हिस्सों में आसमान से आग बरस रही है। गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति सबसे अधिक खतरनाक है। दोपहर के समय घर से निकलना मुश्किल हो गया है, जिससे कामकाज पर असर पड़ा है। बिजली की मांग में भारी वृद्धि हुई है। अत्यधिक तापमान के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में गेहूं और रबी फसलों को नुकसान की आशंका है। इन दिनों गर्मी पडऩे का प्रमुख कारण उत्तर भारत में बारिश और ठंडी हवाएं लाने वाले सिस्टम की कमी रहना है, जिससे आसमान साफ है और सीधी धूप जमीन को बहुत तेजी से गर्म कर रही है। वायुमंडल में गर्म हवा को एक जगह रोक रही है, जिससे हीट डोम जैसी स्थिति बन गई है और तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में इन दिनों लोगों को प्यास ना लगने पर भी नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ORS घोल का सेवन करें। हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। धूप में निकलते समय सिर को टोपी, कपड़े या छाते से ढकें। हल्का और ताजा भोजन करें। इसके अलावा घर के बाहर परिंडों में पानी और पशुओं को छायादार स्थान पर रखें|

