भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के शेयरों में बुधवार सुबह कारोबार के दौरान 2प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। बैंक की आंतरिक निगरानी व्यवस्था और भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। Stock Market के दौरान बैंक का शेयर बीएसई पर 2.27प्रतिशत गिरकर ₹.761.25 तक पहुंच गया। बाद में शेयर ₹.764.70 पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो कि 1.84प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, HDFC Bank के बोर्ड की ऑडिट समिति ने 12मार्च को वित्त वर्ष2024 और वित्त वर्ष2025 के दौरान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को किए गए ₹.45करोड़ के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के आदेश दिए थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह भुगतान निगम द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए गए अलग ब्याज से जुड़ा था। आरोप है कि ब्याज राशि सीधे सरकारी एजेंसी को देने के बजाय बैंक के विपणन विभाग के माध्यम से भेजी गई और इसे सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के खर्च के रूप में दिखाया गया। बताया गया कि इस प्रक्रिया में चार स्थानीय विक्रेताओं का उपयोग किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस व्यवस्था पर बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर चर्चा हुई थी और इसमें बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन भी मौजूद थे।
रिपोर्ट में बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने 18 मार्च को मूल्यों और नैतिकता से जुड़े मतभेदों का हवाला देते हुए पद छोड़ा था। हालांकि बैंक प्रबंधन ने बाद में कहा था कि कई बार पूछने के बावजूद उन्हें किसी विशेष चिंता की जानकारी नहीं दी गई। फिलहाल HDFC Bank की ओर से इस रिपोर्ट को लेकर शेयर बाजार को कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि समाचार प्रकाशित होने से पहले भेजे गए विस्तृत सवालों का जवाब बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों की ओर से नहीं दिया गया। अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद एचडीएफसी समूह के वरिष्ठ अधिकारी केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा था कि बैंक की संचालन व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। इससे पहले मार्च में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि HDFC Bank के प्रशासन और कार्यप्रणाली को लेकर कोई गंभीर चिंता सामने नहीं आई है।

