नई दिल्ली : भारत में वित्त पेशेवर अब केवल पारंपरिक नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि समाज और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली भूमिकाओं की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 81प्रतिशत वित्त पेशेवर भविष्य में ऐसी भूमिकाओं में काम करना चाहते हैं, जो सामाजिक बदलाव लाने में योगदान दें। वहीं, 77प्रतिशत पेशेवर पर्यावरण प्रभाव आधारित करियर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि 51प्रतिशत वित्त पेशेवरों का मानना है कि उनकी मौजूदा भूमिका पहले से ही सामाजिक प्रभाव पैदा कर रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब पेशेवर केवल वेतन और पद तक सीमित सोच नहीं रखते, बल्कि अर्थपूर्ण कार्य और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण को भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यह रिपोर्ट एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब 57प्रतिशत पेशेवर अपनी भूमिकाओं में पहले से एआई उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, 86प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया कि वे एआई से जुड़ी नई क्षमताओं को सीखने और लागू करने में सक्षम हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान समय में वित्त क्षेत्र को तीन बड़े बदलाव प्रभावित कर रहे हैं। इनमें उद्देश्य आधारित कार्य संस्कृति, एआई तकनीक का तेजी से बढ़ता उपयोग और आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख हैं। एसीसीए इंडिया के निदेशक मोहम्मद साजिद खान ने कहा कि भारत में वित्त पेशेवर अब ऐसी नौकरियों की तलाश कर रहे हैं, जो सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव पैदा करें। उन्होंने कहा कि पेशेवर अब उद्देश्य आधारित संस्थानों और अर्थपूर्ण कार्य को अधिक महत्व दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, लेखांकन क्षेत्र अब केवल पारंपरिक करियर तक सीमित नहीं रहा। इसे व्यापक करियर अवसरों के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में पेशेवर उद्यमिता, स्थिरता आधारित भूमिकाओं और विभिन्न विभागों में नेतृत्वकारी जिम्मेदारियों की ओर रुचि दिखा रहे हैं। करीब 68 प्रतिशत पेशेवर भविष्य में उद्यमी बनना चाहते हैं। वहीं, 56 प्रतिशत लोगों ने पारंपरिक लेखांकन से बाहर अन्य भूमिकाओं में काम करने की इच्छा जताई। कार्य संस्कृति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, 79 प्रतिशत पेशेवर हाइब्रिड कार्य मॉडल को पसंद कर रहे हैं, जबकि 74प्रतिशत लोग निर्धारित कार्यालय उपस्थिति के पक्ष में हैं।

